भोजशाला विवाद: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती
भोजशाला विवाद: MP हाईकोर्ट के फैसले को अब सुप्रीम कोर्ट में चुनौती

Image: Aaj Tak
मध्य प्रदेश के भोजशाला मामले में मुस्लिम पक्ष ने उच्च न्यायालय के निर्णय को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। हाईकोर्ट ने परिसर को देवी सरस्वती का मंदिर घोषित करते हुए मुस्लिम समुदाय की जुमे की नमाज की अनुमति रद्द कर दी थी। मुस्लिम पक्ष का आरोप है कि यह निर्णय पुरातात्विक साक्ष्यों और उपासना स्थल अधिनियम के विपरीत है।
- 01मुस्लिम पक्ष के काजी मोइनुद्दीन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है।
- 02हाईकोर्ट ने भोजशाला परिसर को देवी सरस्वती का मंदिर घोषित किया था।
- 03भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के 2003 के आदेश को रद्द किया गया।
- 04हिंदू पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल की है।
- 05मुस्लिम पक्ष को मस्जिद के लिए अलग जमीन तलाशने का सुझाव दिया गया था।
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मध्य प्रदेश के धार जिले में भोजशाला मामले में मुस्लिम पक्ष ने उच्च न्यायालय के निर्णय को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। काजी मोइनुद्दीन की ओर से दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने परिसर को देवी सरस्वती का मंदिर घोषित करते हुए मुस्लिम समुदाय को जुमे की नमाज पढ़ने की अनुमति रद्द कर दी, जो कि उपासना स्थल अधिनियम (Places of Worship Act, 1991) की मूल भावना के खिलाफ है। हाईकोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के 2003 के आदेश को रद्द करते हुए मुस्लिम पक्ष को मस्जिद के लिए अलग से भूमि तलाशने का सुझाव दिया। इस निर्णय के बाद, हिंदू पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल की है, ताकि कोर्ट एकतरफा आदेश न दे सके। यह मामला धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से संवेदनशील है, और इसके परिणाम व्यापक प्रभाव डाल सकते हैं।
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इस मामले का फैसला धार्मिक समुदायों के बीच तनाव को बढ़ा सकता है और स्थानीय शांति को प्रभावित कर सकता है।
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