सुप्रीम कोर्ट की चिंता: स्कूलों में शौचालय और सेनिटरी नैपकिन की कमी से न रुके बेटियों की पढ़ाई
शौचालय या सेनिटरी नैपकिन के अभाव में नहीं बंद होनी चाहिए बेटियों की पढ़ाई, सुप्रीम कोर्ट ने जताई चिंता
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Image: Jagran
सुप्रीम कोर्ट ने स्कूलों में सेनिटरी नैपकिन और शौचालय की कमी के कारण बेटियों की पढ़ाई बंद होने पर चिंता जताई। कोर्ट ने केंद्र को निर्देश दिया कि वह सभी राज्यों में इन सुविधाओं को सुनिश्चित करे।
- 01सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लड़कियों को सेनिटरी नैपकिन और शौचालय की कमी के कारण पढ़ाई छोड़ने की स्थिति नहीं आनी चाहिए।
- 02केंद्र को 30 जनवरी के फैसले का पालन सुनिश्चित करने के लिए निर्देश दिया गया है।
- 03अधिकारियों को लड़कियों को मुफ्त सेनिटरी नैपकिन और अलग शौचालय उपलब्ध कराने का आदेश दिया गया।
- 04कोर्ट ने हर तीन महीने में प्रगति रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।
- 05सुप्रीम कोर्ट ने लैंगिक न्याय और शैक्षिक समानता सुनिश्चित करने के लिए सभी राज्यों को निर्देश दिए हैं।
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सुप्रीम कोर्ट ने स्कूलों में सेनिटरी नैपकिन और शौचालय की कमी के चलते लड़कियों की पढ़ाई पर चिंता जताई है। कोर्ट ने सोमवार को कहा कि इस कमी के कारण लड़कियों को पढ़ाई छोड़ने की स्थिति नहीं आनी चाहिए। जस्टिस जेबी पार्डीवाला और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने केंद्र को निर्देश दिया कि वह 30 जनवरी के फैसले का पालन सुनिश्चित करे, जिसमें सभी राज्यों को लड़कियों के लिए मुफ्त सेनिटरी नैपकिन और अलग शौचालय की व्यवस्था करने का निर्देश दिया गया था। कोर्ट ने कहा कि यह सुनिश्चित करना केंद्र की जिम्मेदारी है कि लड़कियों को इन सुविधाओं का लाभ मिले। इसके साथ ही, कोर्ट ने हर तीन महीने में प्रगति रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है, ताकि निर्देशों के पालन की निगरानी की जा सके।
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यह निर्णय स्कूलों में लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देगा और उन्हें घरेलू कार्यों से दूर रखेगा।
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