H-1B वर्कर की अमेरिका में जीवन की चुनौतियाँ: परिवार से दूर रहने की पीड़ा
वीजा स्टेटस और जॉब की चिंता में फंसा H1B वर्कर, कहा- '2 साल में एक बार पैरेंट्स से मिल पाता हूं', उठाए ये सवाल
Nbt NavbharattimesImage: Nbt Navbharattimes
एक भारतीय टेक वर्कर ने अमेरिका में H-1B वीजा पर काम करते हुए परिवार से दूर रहने की चुनौतियों को साझा किया है। उसने बताया कि वह दो साल में एक बार अपने माता-पिता से मिल पाता है और नौकरी की असुरक्षा उसे मानसिक तनाव में डाल रही है।
- 01H-1B वीजा पर काम करने वाले वर्कर को परिवार से दूर रहने का दुख है।
- 02अमेरिका में नौकरी की असुरक्षा और लंबी कार्य अवधि से मानसिक तनाव बढ़ रहा है।
- 03वित्तीय स्वतंत्रता और कनाडा को बैकअप विकल्प के रूप में देखने की सलाह दी गई है।
- 04भारत लौटने का विकल्प भी मानसिक शांति के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।
- 05स्किल अपग्रेडेशन से नौकरी की सुरक्षा बढ़ाई जा सकती है।
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एक भारतीय टेक वर्कर ने अमेरिका में H-1B वीजा पर जीवन की कठिनाइयों को साझा किया है। 2018 में मास्टर्स की पढ़ाई के लिए अमेरिका आए इस वर्कर ने 2022 में H-1B लॉटरी में सफलता पाई। हालांकि, वह अपने परिवार से दूर रहने और नौकरी की असुरक्षा के कारण मानसिक तनाव महसूस कर रहा है। उसने बताया कि वह अपने माता-पिता से केवल दो साल में एक बार मिल पाता है। इसके अलावा, उसने सुझाव दिया है कि भारतीय वर्कर्स को वित्तीय स्वतंत्रता पर ध्यान देना चाहिए और कनाडा को बैकअप विकल्प के रूप में देखना चाहिए। अगर अमेरिका में अकेलापन बढ़ता है, तो भारत लौटने का विकल्प भी विचारणीय हो सकता है। इसके साथ ही, स्किल अपग्रेडेशन से नौकरी की सुरक्षा में मदद मिल सकती है।
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यह कहानी उन भारतीय वर्कर्स के लिए महत्वपूर्ण है जो अमेरिका में काम कर रहे हैं और परिवार से दूर रहने की चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।
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