महाराष्ट्र में 80 हजार छात्रों का मराठी में फेल होना, सरकार की भाषा नीति पर सवाल
जिस भाषा में बोलता है पूरा राज्य, उसी में फेल हो गए 80 हजार छात्र; 10वीं के रिजल्ट ने पूरी सरकार को कर दिया दंग
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महाराष्ट्र में 10वीं कक्षा के SSC परीक्षा में 80,803 छात्रों ने मराठी भाषा में फेल होकर सरकार की भाषा नीति पर सवाल उठाया है। कुल 10,98,623 छात्रों ने मराठी को पहली भाषा के रूप में चुना, जिनमें से 92.57% पास हुए। यह नतीजा परिवारों की भाषाई आदतों में बदलाव का संकेत देता है।
- 0180,803 छात्रों ने मराठी में फेल होकर चिंता बढ़ाई है।
- 0210,98,623 छात्रों ने मराठी को पहली भाषा के रूप में चुना था।
- 0392.57% छात्रों ने मराठी में सफलता प्राप्त की।
- 04शहरीकरण और इंग्लिश मीडियम स्कूलों की बढ़ती संख्या का प्रभाव।
- 05राजनीतिक प्रयासों पर यह नतीजा बड़ा सवाल खड़ा करता है।
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महाराष्ट्र में 10वीं कक्षा के SSC परीक्षा के परिणाम ने सरकार को हैरान कर दिया है, जब 80,803 छात्र मराठी भाषा में फेल हो गए। इस वर्ष 10,98,623 छात्रों ने मराठी को पहली भाषा के रूप में चुना, जिनमें से 92.57% पास हुए। यह नतीजा दर्शाता है कि 8% छात्रों ने मराठी में असफलता प्राप्त की है। इसके अलावा, 4,13,917 छात्रों ने मराठी को दूसरी या तीसरी भाषा के रूप में चुना, जिनमें से केवल 13,741 फेल हुए। विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल छात्रों की समस्या नहीं है, बल्कि यह परिवारों की भाषाई आदतों में बदलाव का संकेत है। शहरीकरण और इंग्लिश मीडियम स्कूलों की बढ़ती संख्या ने छात्रों के मराठी के साथ संबंध को कमजोर किया है। यदि यह प्रवृत्ति जारी रहती है, तो यह महाराष्ट्र में मराठी को बढ़ावा देने के प्रयासों के लिए एक बड़ा झटका हो सकता है।
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यह नतीजा महाराष्ट्र में शिक्षा प्रणाली और भाषा नीति पर गंभीर सवाल उठाता है। अगर छात्रों की भाषाई आदतें नहीं बदलीं, तो भविष्य में मराठी भाषा के प्रति छात्रों का जुड़ाव और भी कम हो सकता है।
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