हिमाचल प्रदेश में बुजुर्गों की संख्या बढ़ी, बच्चों की जनसंख्या में कमी
हिमाचल में तेजी से बढ़ रहे बुजुर्ग, बच्चों की आबादी घटी; 44% से ज्यादा आबादी अविवाहित
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हिमाचल प्रदेश में बुजुर्गों की आबादी तेजी से बढ़ रही है, जो 60 वर्ष और उससे अधिक आयु के 13% तक पहुंच गई है। वहीं, 0-4 वर्ष आयु वर्ग की जनसंख्या केवल 6.5% है, जो राष्ट्रीय औसत से कम है। 44.5% आबादी अविवाहित है, जो जन्म दर में कमी का एक कारण है।
- 01हिमाचल प्रदेश में बुजुर्गों की आबादी 60 वर्ष और उससे अधिक आयु के 13% तक पहुंच गई है।
- 020-4 वर्ष आयु वर्ग की जनसंख्या केवल 6.5% है, जो राष्ट्रीय औसत 7.9% से कम है।
- 0344.5% आबादी अविवाहित है, जबकि 51.7% आबादी विवाहित है।
- 04ग्रामीण क्षेत्रों में बुजुर्ग आबादी 13.2% और शहरी क्षेत्रों में 10.9% है।
- 0515-59 वर्ष आयु वर्ग की कामकाजी आबादी 66.5% है, जो राष्ट्रीय औसत 66.4% के करीब है।
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हिमाचल प्रदेश अब एक वृद्धजन प्रधान राज्य बनता जा रहा है, जहां 60 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों की आबादी 13% तक पहुंच गई है। यह आंकड़ा राष्ट्रीय औसत 9.7% से अधिक है। बुजुर्गों की संख्या में वृद्धि के साथ-साथ, बच्चों की जनसंख्या में कमी आ रही है, जिसमें 0-4 वर्ष आयु वर्ग की जनसंख्या केवल 6.5% है। यह आंकड़ा ग्रामीण क्षेत्रों में 6.6% और शहरी क्षेत्रों में 5.1% है। इसके अलावा, 44.5% आबादी अविवाहित है, जो जन्म दर में कमी का एक महत्वपूर्ण कारण है। राज्य में 15-59 वर्ष आयु वर्ग की कामकाजी आबादी 66.5% है, जो दर्शाता है कि वर्तमान में कार्यशील जनसंख्या संतुलित है, लेकिन भविष्य में बुजुर्गों की संख्या बढ़ने से यह संतुलन प्रभावित हो सकता है।
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बुजुर्गों की बढ़ती जनसंख्या से भविष्य में श्रमशक्ति और स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव बढ़ सकता है।
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