हिमाचल प्रदेश में डिजिटल भुगतान से नकदी पर निर्भरता में कमी
हिमाचल: जेब में नकदी कम, मोबाइल फोन बना बटुआ, डिजिटल भुगतान व्यवस्था ने कम की नकदी पर निर्भरता
Amar Ujala
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हिमाचल प्रदेश में डिजिटल भुगतान प्रणाली के बढ़ते उपयोग के कारण नकदी पर निर्भरता कम हो रही है। वित्त वर्ष 2023 में प्रति एटीएम औसत नकदी वितरण 1.21 करोड़ रुपये से घटकर वित्त वर्ष 2024 में 1.12 करोड़ रुपये हो गया। ग्रामीण क्षेत्रों में भी यूपीआई तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।
- 01हिमाचल प्रदेश में प्रति एटीएम औसत नकदी वितरण में कमी आई है।
- 02डिजिटल भुगतान प्रणाली ने आम लोगों की जिंदगी में महत्वपूर्ण स्थान बना लिया है।
- 03ग्रामीण क्षेत्रों में भी यूपीआई का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है।
- 04500 रुपये के नोटों की मांग में कमी आई है, जबकि 100 रुपये के नोटों की मांग बढ़ी है।
- 05डिजिटल भुगतान के साथ साइबर धोखाधड़ी की घटनाएं बढ़ रही हैं।
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हिमाचल प्रदेश में डिजिटल भुगतान प्रणाली के उपयोग में वृद्धि के चलते नकदी पर निर्भरता कम हो रही है। वित्त वर्ष 2023 में प्रति एटीएम औसत नकदी वितरण 1.21 करोड़ रुपये से घटकर वित्त वर्ष 2024 में 1.12 करोड़ रुपये हो गया, और वित्त वर्ष 2026 के प्रारंभिक महीनों में यह 1.03 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। एसबीआई रिसर्च के अनुसार, 100 रुपये के नोटों की मांग में 0.3 फीसदी की वृद्धि हुई है, जबकि 500 रुपये के नोटों की मांग में 0.7 फीसदी की कमी आई है। डिजिटल भुगतान ने सरकारी योजनाओं और स्मार्टफोन की बढ़ती पहुंच के साथ आम लोगों की जीवनशैली का हिस्सा बन गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी यूपीआई तेजी से लोकप्रिय हो रहा है, जिससे छोटे कारोबारी नकदी की झंझट से बच रहे हैं। हालांकि, साइबर धोखाधड़ी की घटनाएं बढ़ने से लोगों को सतर्क रहने की आवश्यकता है।
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डिजिटल भुगतान प्रणाली के बढ़ने से ग्राहकों को नकद लेन-देन की समस्या का सामना नहीं करना पड़ता, जिससे उनकी खरीदारी में आसानी होती है।
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