सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ संस्थानों को अदालती शुल्क छूट पर उठाए सवाल
'वक्फ संस्थानों को क्यों मिले छूट?', सुप्रीम कोर्ट ने अदालती शुल्क न देने पर पूछा कानूनी आधार
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Image: Jagran
सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ संस्थानों को अदालती शुल्क से छूट देने के कानूनी आधार पर सवाल उठाया। यह टिप्पणी गुजरात हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर याचिका की सुनवाई के दौरान की गई, जिसमें अदालती शुल्क न देने पर वक्फ मुकदमे खारिज करने का फैसला बरकरार रखा गया था।
- 01सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ संस्थानों को अदालती शुल्क से छूट देने के कानूनी आधार पर सवाल उठाया।
- 02गुजरात हाई कोर्ट ने वक्फ संस्थानों की याचिकाएं खारिज की थीं, जिसमें कहा गया था कि उन्हें अदालती शुल्क से छूट नहीं है।
- 03याचिकाकर्ता के वकील ने अतिरिक्त दस्तावेज दाखिल करने के लिए समय मांगा।
- 04जस्टिस पीएस नरसिम्हा ने छूट के कानूनी आधार के बारे में सवाल किया।
- 05सुनवाई को 7 अगस्त तक स्थगित किया गया है।
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सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को वक्फ संस्थानों को अदालती शुल्क से छूट देने के कानूनी आधार पर सवाल उठाया। जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस अरविंद कुमार की पीठ ने यह टिप्पणी गुजरात हाई कोर्ट के उस आदेश के खिलाफ दायर याचिका की सुनवाई के दौरान की, जिसमें अदालती शुल्क न देने के कारण वक्फ मुकदमों को खारिज करने का फैसला बरकरार रखा गया था। हाई कोर्ट ने कहा था कि वक्फ संस्थाएं अदालती शुल्क से मुक्त नहीं हैं। याचिकाकर्ता के वकील एजाज मकबूल ने अतिरिक्त दस्तावेज दाखिल करने के लिए समय मांगा, लेकिन जस्टिस नरसिम्हा ने छूट के कानूनी आधार के बारे में सवाल किया। सुनवाई को 7 अगस्त तक स्थगित कर दिया गया है। यह मामला वक्फ अधिनियम की धारा-83 से संबंधित है, जिसमें अदालती शुल्क के भुगतान से छूट की बात की गई है।
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सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय वक्फ संस्थानों के लिए अदालती प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है।
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