ऑस्ट्रेलिया में चूहों के आतंक से किसान परेशान, खेतों में माउस प्लेग का कहर
ऑस्ट्रेलिया में चूहों के आतंक से किसान त्रस्त, खेतों से घरों तक माउस प्लेग का कहर; पानी में बह रही अन्नदाताओं की गाढ़ी कमाई
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ऑस्ट्रेलिया के पश्चिमी और दक्षिणी हिस्सों में चूहों के प्रकोप ने किसानों को गंभीर संकट में डाल दिया है। खेतों में प्रति हेक्टेयर 8,000 चूहों की संख्या पहुंच गई है, जिससे फसलें नष्ट हो रही हैं और किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है। सरकार ने चूहों को नियंत्रित करने के लिए जहर वाले चारे की अनुमति दी है।
- 01पश्चिमी और दक्षिणी ऑस्ट्रेलिया में चूहों की संख्या प्रति हेक्टेयर 8,000 तक पहुंच गई है।
- 02किसान पहले से ही ईंधन और खाद की महंगाई से परेशान थे, अब चूहों ने नई मुसीबत खड़ी कर दी है।
- 03चूहों का प्रजनन औसतन 6 हफ्ते में शुरू होता है और हर 19-21 दिन में 6-10 बच्चे पैदा करते हैं।
- 04सरकार ने किसानों को मजबूत जहर वाले चारे का उपयोग करने की अनुमति दी है।
- 05किसान उम्मीद कर रहे हैं कि सर्दियों की बारिश और नए चारे से चूहों की संख्या में कमी आएगी।
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ऑस्ट्रेलिया के पश्चिमी और दक्षिणी हिस्सों में चूहों का प्रकोप किसानों के लिए गंभीर समस्या बन गया है। खेतों में प्रति हेक्टेयर चूहों की संख्या 8,000 तक पहुंच गई है, जबकि सामान्य सीमा 800 मानी जाती है। इससे फसलें नष्ट हो रही हैं और किसान आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। पिछले साल रिकॉर्ड फसल के कारण खेतों में अनाज बिखर गया, जिससे चूहों को खाने के लिए पर्याप्त चारा और छिपने की जगह मिली। चूहों का प्रजनन तेजी से होता है, जिससे उनकी संख्या में वृद्धि हो रही है। किसानों ने बताया कि नई बोई गई फसल के बीज रातोंरात चूहों द्वारा खा लिए जाते हैं, जिससे उन्हें फिर से फसल बोनी पड़ती है। इस स्थिति से निपटने के लिए, ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने हाल ही में किसानों को मजबूत जहर वाले चारे का उपयोग करने की अनुमति दी है, जिससे उम्मीद है कि सर्दियों में चूहों की संख्या कम होगी।
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किसानों को चूहों के प्रकोप के कारण भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है, जिससे उनकी फसलें नष्ट हो रही हैं।
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