भारतीय रुपये की गिरावट और वैश्विक आर्थिक चुनौतियाँ
डॉलर की मजबूती और तेल की मार, आखिर कब मिलेगी राहत?
Image: Globalherald
भारतीय रुपये की गिरावट और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बन चुकी हैं। भारतीय रिजर्व बैंक और सरकार रुपये को 100 रुपये के स्तर तक गिरने से रोकने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन वैश्विक परिस्थितियों के चलते स्थिति में सुधार की संभावना कम है।
- 01अरविंद पनगढ़िया (पूर्व उपाध्यक्ष, नीति आयोग) ने केंद्रीय बैंक को बाजार में हस्तक्षेप न करने की सलाह दी है।
- 02भारत ने रूस से रियायती दरों पर तेल खरीदा, लेकिन अमेरिकी दबाव के चलते खरीद में कटौती की गई।
- 03ब्रिक्स देश डॉलर के वर्चस्व को चुनौती देने के लिए साझा मुद्रा पर विचार कर रहे हैं।
- 04भारत को पाकिस्तान और चीन के साथ क्षेत्रीय तनावों का सामना करना पड़ रहा है।
- 05आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि स्थिति में सुधार में पांच से छह महीने लग सकते हैं।
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भारतीय रुपये की गिरावट और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें वर्तमान में भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण चुनौतियाँ बन चुकी हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और भारत सरकार का प्रयास है कि रुपये की कीमत 100 रुपये प्रति डॉलर तक न गिरे। नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया ने इसे एक 'नंबर गेम' का भ्रम बताते हुए केंद्रीय बैंक को बाजार में अत्यधिक हस्तक्षेप न करने की सलाह दी है। रूस-यूक्रेन विवाद के दौरान भारत ने रियायती दरों पर तेल खरीदा, लेकिन अमेरिकी दबाव के चलते इस खरीद में कटौती की गई। ब्रिक्स (BRICS) और शंघाई सहयोग संगठन (SCO) जैसे मंचों पर चीन, रूस और ईरान की बढ़ती नजदीकियां भारत के लिए नई कूटनीतिक चुनौतियां खड़ी कर रही हैं। इसके अलावा, भारत को पाकिस्तान और चीन के साथ क्षेत्रीय तनावों का सामना करना पड़ रहा है। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आपूर्ति शृंखला में सुधार होने पर भी स्थिति में सुधार में लगभग 5 से 6 महीने लग सकते हैं।
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रुपये की गिरावट और तेल की बढ़ती कीमतें आम लोगों के जीवन स्तर को प्रभावित कर सकती हैं।
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