आजमगढ़ के महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय में रिश्वतखोरी का मामला उजागर
महाराजा सुहेलदेव यूनिवर्सिटी में 'रिश्वत का खेल' बेनकाब! डिग्री कॉलेज की मान्यता के नाम पर हो रही थी मोटी उगाही
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आजमगढ़ के महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय में गोरखपुर विजिलेंस टीम ने रिश्वतखोरी के मामले में कार्रवाई की। विश्वविद्यालय के डिस्पेचर बाबू संजय यादव को 50,000 रुपये की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया। आरोप है कि एक डिग्री कॉलेज की मान्यता के लिए कुल 3 लाख रुपये की मांग की जा रही थी।
- 01गोरखपुर विजिलेंस टीम ने महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय में छापेमारी की।
- 02डिस्पेचर बाबू संजय यादव को 50,000 रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा गया।
- 03डिग्री कॉलेज की मान्यता के लिए 3 लाख रुपये की मांग की जा रही थी।
- 04छापेमारी में 1,80,000 रुपये नगद भी बरामद हुए।
- 05रजिस्ट्रार डॉ. अंजनी कुमार मिश्रा पर भी गंभीर आरोप लगे हैं।
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आजमगढ़, उत्तर प्रदेश में स्थित महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय में गोरखपुर विजिलेंस टीम ने रिश्वतखोरी के एक गंभीर मामले का खुलासा किया है। टीम ने विश्वविद्यालय के डिस्पेचर बाबू संजय यादव को 50,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया। आरोप है कि संजय यादव और विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार डॉ. अंजनी कुमार मिश्रा के इशारे पर एक डिग्री कॉलेज की मान्यता के लिए कुल 3 लाख रुपये की मांग की जा रही थी। शिकायतकर्ता, रामबदन सिंह महाविद्यालय के प्रबंधक सुधीर सिंह ने इस मामले की शिकायत विजिलेंस टीम से की थी। छापेमारी के दौरान संजय यादव के कार्यालय की आलमारी से 1,80,000 रुपये नगद भी बरामद हुए, जिससे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है। विजिलेंस टीम अब अन्य लोगों की संलिप्तता की भी जांच कर रही है। इस कार्रवाई ने विश्वविद्यालय के प्रशासनिक तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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इस कार्रवाई से विश्वविद्यालय के प्रशासनिक तंत्र की ईमानदारी पर सवाल उठ रहे हैं, जिससे छात्रों और शिक्षकों के बीच विश्वास में कमी आ सकती है।
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