दिल्ली हाई कोर्ट ने 2016 हिट एंड रन मामले में नाबालिग पर गैर इरादतन हत्या का केस चलाने का निर्णय किया
17 साल के रईसजादे पर चलेगा 'गैर इरादतन हत्या' का केस, 2016 मर्सिडीज हिट एंड रन केस में दिल्ली HC का बड़ा फैसला
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दिल्ली हाई कोर्ट ने 2016 के हिट एंड रन मामले में नाबालिग आरोपित के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मुकदमा चलाने का निर्णय बरकरार रखा है। आरोपित ने बिना वैध लाइसेंस के तेज गति से गाड़ी चलाते हुए एक व्यक्ति की जान ली। इस मामले में अदालत ने बचाव पक्ष के तर्कों को खारिज कर दिया।
- 01दिल्ली हाई कोर्ट ने नाबालिग के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मुकदमा चलाने का निर्णय बरकरार रखा।
- 02आरोपित ने बिना लाइसेंस के 80-100 किमी प्रति घंटे की गति से गाड़ी चलाई।
- 03घटना में सिद्धार्थ शर्मा की मृत्यु हुई, जो सड़क पार कर रहे थे।
- 04अदालत ने बचाव पक्ष के तर्कों को ठुकरा दिया।
- 05इस मामले में आईपीसी की धारा-304 भाग-दो लागू होगी।
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दिल्ली के सिविल लाइन्स इलाके में 2016 में हुए हिट एंड रन मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने नाबालिग आरोपित के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मुकदमा चलाने का निर्णय बरकरार रखा है। न्यायमूर्ति अमित महाजन की पीठ ने कहा कि ट्रायल कोर्ट का निर्णय सही है और इसमें हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं है। आरोपित ने बिना वैध ड्राइविंग लाइसेंस के 80-100 किमी प्रति घंटे की तेज गति से मर्सिडीज कार चलाई, जिससे सिद्धार्थ शर्मा की सड़क पार करते समय मृत्यु हो गई। अदालत ने कहा कि घटना के समय आरोपित की उम्र 17 साल 11 महीने थी और उसने गाड़ी चलाते समय ब्रेक नहीं लगाए, जिससे यह स्पष्ट होता है कि उसकी लापरवाही के कारण यह घटना हुई। बचाव पक्ष के तर्कों को खारिज करते हुए अदालत ने कहा कि तेज रफ्तार और लाइसेंस का न होना धारा-304 भाग-दो के तहत आरोप तय करने के लिए पर्याप्त है। इस मामले में आईपीसी की धारा-304 भाग-दो के तहत अधिकतम 10 साल की सजा का प्रावधान है।
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इस निर्णय से सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ेगी और नाबालिगों के द्वारा की जाने वाली लापरवाह ड्राइविंग के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई का संकेत मिलता है।
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