भारतीय अर्थव्यवस्था की चौथी तिमाही में 7.8% की वृद्धि, वैश्विक चुनौतियों के बावजूद मजबूती
वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था में तेजी, चौथी तिमाही में GDP ग्रोथ 7.8 फीसदी रही

Image: Jagran
भारतीय अर्थव्यवस्था ने चौथी तिमाही में 7.8% की वृद्धि दर्ज की, जबकि वैश्विक संकट और तेल की कीमतों में वृद्धि के बावजूद। वित्त वर्ष 2025-26 में विकास दर 7.7% रही, जिसमें मैन्यूफैक्चरिंग और सेवा क्षेत्र का महत्वपूर्ण योगदान है।
- 012025-26 की चौथी तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर 7.8% रही, जो पिछले वर्ष की तुलना में अधिक है।
- 02वित्त वर्ष 2025-26 में कुल जीडीपी 323.12 लाख करोड़ रुपये हो गई।
- 03मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र में 10.7% और सेवा क्षेत्र में 11.0% की वृद्धि हुई।
- 04भारतीय रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए विकास दर का अनुमान कम किया है।
- 05मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने वैश्विक हालात पर निगरानी रखने की आवश्यकता बताई।
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भारतीय अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में 7.8% की वृद्धि दर्ज की, जो पिछले वित्त वर्ष की अंतिम तिमाही की तुलना में अधिक है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) के अनुसार, इस वृद्धि का मुख्य कारण मैन्यूफैक्चरिंग और सेवा क्षेत्र का योगदान है। इस वित्त वर्ष में कुल जीडीपी 323.12 लाख करोड़ रुपये हो गई, जबकि वर्तमान मूल्य पर जीडीपी 346 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई। हालांकि, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 के लिए विकास दर के अपने अनुमान को कम किया है। मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने पश्चिम एशिया संकट और तेल की बढ़ती कीमतों के प्रभाव पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि यदि वैश्विक स्थिति में सुधार होता है, तो भारत की विकास दर अगले वित्त वर्ष में 7% को पार कर सकती है।
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भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती से रोजगार और विकास के अवसर बढ़ सकते हैं।
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