सूर्य के विस्फोट से उत्पन्न लावा का पृथ्वी पर प्रभाव और भारत में रंगीन आकाश
क्या धरती से टकरा सकता है सूरज से निकला ये लावा? भारत के आसमान में दिखेगी रंग बिरंगी रोशनी
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6 जून को सूर्य पर एक शक्तिशाली विस्फोट हुआ, जिससे एक अरब टन प्लाज्मा का बादल पृथ्वी की ओर बढ़ रहा है। इस सौर तूफान का असर संचार प्रणालियों पर पड़ सकता है, लेकिन यह भारत में भी रंग-बिरंगी रोशनी का दृश्य उत्पन्न करेगा, विशेषकर लद्दाख और हिमाचल प्रदेश में।
- 01सूर्य पर हुए विस्फोट से एक अरब टन प्लाज्मा का बादल अंतरिक्ष में निकला है, जिसकी गति 1400 किलोमीटर प्रति सेकंड है।
- 02यह सौर तूफान जी-3 श्रेणी का भू-चुंबकीय तूफान है, जो जी-4 स्तर तक पहुंच सकता है।
- 03इस तूफान के कारण मोबाइल नेटवर्क, GPS सेवाओं और संचार प्रणालियों में अस्थायी व्यवधान आ सकता है।
- 04पृथ्वी का चुंबकीय कवच सौर कणों से सुरक्षा प्रदान करता है, जिससे ऑरोरा जैसे रंगीन प्रकाश का निर्माण होता है।
- 05भारत के लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में इस सौर तूफान के कारण आसमान में रंग-बिरंगी रोशनी दिखाई देगी।
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6 जून को सूर्य पर एक शक्तिशाली विस्फोट हुआ, जिसे वैज्ञानिकों ने एक्टिव रीजन 4461 नाम दिया है। इस विस्फोट से लगभग एक अरब टन वजनी चुंबकीय प्लाज्मा का बादल अंतरिक्ष में निकला है, जो पृथ्वी की ओर बढ़ रहा है। इसकी गति लगभग 1400 किलोमीटर प्रति सेकंड है, जिससे यह अनुमान लगाया जा सकता है कि यह बादल कश्मीर से कन्याकुमारी तक की दूरी एक सेकंड में तय कर सकता है। NASA ने इस घटना को जी-3 श्रेणी का भू-चुंबकीय तूफान बताया है, जो जी-4 स्तर तक पहुंच सकता है। इस सौर तूफान का सीधा प्रभाव संचार प्रणालियों पर पड़ सकता है, जिससे मोबाइल नेटवर्क और GPS सेवाओं में व्यवधान आ सकता है। हालांकि, इस घटना का एक सकारात्मक पहलू भी है; पृथ्वी का चुंबकीय कवच सौर कणों को रोकता है, जिससे ऑरोरा जैसे रंगीन प्रकाश का निर्माण होता है। इस बार यह खूबसूरत नजारा भारत के लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में भी दिखाई देगा, जहां लोग आसमान में हरे और लाल रंग की चमक देख सकेंगे।
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संचार प्रणालियों में अस्थायी व्यवधान आ सकता है, जिससे मोबाइल नेटवर्क और GPS सेवाओं में समस्या हो सकती है।
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