सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: बाईगेमी मामले में रिश्तेदारों पर आरोप नहीं
'माता-पिता और बहन को दूसरी शादी की जानकारी, सिर्फ इसलिए उन पर केस नहीं कस सकते', बाईगेमी में SC का बड़ा फैसला
Nbt NavbharattimesImage: Nbt Navbharattimes
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि पति की दूसरी शादी की जानकारी होने पर उसके रिश्तेदारों को बाईगेमी के आरोप में आरोपी नहीं ठहराया जा सकता। जब तक यह साबित न हो कि रिश्तेदारों ने शादी को संपन्न कराने में सक्रिय भूमिका निभाई, उन पर कार्रवाई नहीं की जा सकती।
- 01सुप्रीम कोर्ट ने बाईगेमी के मामले में रिश्तेदारों पर आरोप लगाने की प्रक्रिया को स्पष्ट किया।
- 02रिश्तेदारों के खिलाफ आरोप सामान्य और अस्पष्ट पाए गए।
- 03अदालत ने स्पष्ट किया कि सक्रिय भूमिका का प्रमाण आवश्यक है।
- 04इस फैसले से पारिवारिक विवादों में रिश्तेदारों को बचाने में मदद मिलेगी।
- 05आपसी विवादों में केवल सामान्य आरोपों के आधार पर कार्रवाई नहीं हो सकती।
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सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि पति की दूसरी शादी की जानकारी होने पर उसके परिवार के सदस्यों को बाईगेमी के आरोप में आरोपी नहीं ठहराया जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि जब तक यह साबित नहीं होता कि रिश्तेदारों ने दूसरी शादी को संपन्न कराने में कोई सक्रिय भूमिका निभाई, तब तक उन पर भारतीय दंड संहिता की धारा 494 के तहत कार्रवाई नहीं की जा सकती। जस्टिस संजय करोल और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने पति के पिता, मां और बहन के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया। शिकायतकर्ता पत्नी ने आरोप लगाया था कि ससुराल पक्ष ने उसे क्रूरता का शिकार बनाया और पति को दूसरी शादी करने के लिए प्रोत्साहित किया। हालांकि, अदालत ने पाया कि रिश्तेदारों के खिलाफ आरोप सामान्य और अस्पष्ट थे। इस निर्णय से यह स्पष्ट होता है कि आपराधिक जिम्मेदारी तय करने के लिए स्पष्ट और विशिष्ट सबूतों की आवश्यकता है।
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यह फैसला पारिवारिक विवादों में रिश्तेदारों को बचाने में मदद करेगा और उन्हें बिना ठोस सबूत के आरोपी नहीं ठहराया जा सकेगा।
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