मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने बहुविवाह पर दी जानकारी, इस्लाम की सीमाओं को स्पष्ट किया
मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने कहा- दुनिया के कई धर्मों में है बहुविवाद की प्रथा, इस्लाम ने चार की ही इजाजत
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आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने लखनऊ में एक कार्यशाला के दौरान बहुविवाह की प्रथा पर चर्चा की। इस्लाम में चार शादियों की अनुमति दी गई है, जबकि अन्य धर्मों में यह प्रथा अधिक प्रचलित है। बोर्ड ने न्याय और संतुलन बनाए रखने के लिए इस्लाम के सिद्धांतों को रेखांकित किया।
- 01आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने हालिया अदालत के फैसलों को पक्षपातपूर्ण बताया, लेकिन किसी विशेष फैसले का उल्लेख नहीं किया।
- 02अतीक अहमद बस्तवी ने कहा कि ऐसे कानून जो मानवता के लिए कष्टदायक हैं, इस्लाम का हिस्सा नहीं हो सकते।
- 03मुनव्वर सुल्तान ने इस्लाम में तलाक के अधिकारों की समानता पर जोर दिया, जिसमें पुरुषों और महिलाओं को समान अधिकार दिए गए हैं।
- 04सोशल मीडिया पर इस्लामी शरीयत के बारे में फैलाए जा रहे भ्रम को दूर करने की आवश्यकता पर बल दिया गया।
- 05कार्यशाला में देशभर के मुस्लिम बुद्धिजीवियों और धार्मिक नेताओं ने भाग लिया।
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आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने लखनऊ में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला के समापन पर बहुविवाह की प्रथा पर चर्चा की। इस्लाम में बहुविवाह को चार शादियों तक सीमित किया गया है, जबकि अन्य धर्मों में यह प्रथा अधिक व्यापक है। आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्यों ने इस बात पर जोर दिया कि जो कानून मानवता के लिए कष्टदायक हैं, वे इस्लाम का हिस्सा नहीं हो सकते। अतीक अहमद बस्तवी ने शरीयत के सिद्धांतों को स्पष्ट करते हुए कहा कि इस्लाम में न्याय और संतुलन बनाए रखने के लिए बहुविवाह की अनुमति दी गई है। मुनव्वर सुल्तान ने इस्लाम में तलाक के अधिकारों की समानता की बात की, जिसमें महिलाओं को भी उतना ही अधिकार दिया गया है जितना पुरुषों को। कार्यशाला में उपस्थित वक्ताओं ने सोशल मीडिया पर इस्लाम के बारे में फैले भ्रम को दूर करने की आवश्यकता पर बल दिया। इस कार्यक्रम में देशभर के प्रतिष्ठित मुस्लिम बुद्धिजीवियों और धार्मिक नेताओं ने भाग लिया।
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इस कार्यशाला से मुस्लिम समुदाय में कानूनी जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया गया है, जो समाज में न्याय और संतुलन को बनाए रखने में मदद करेगा।
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