भारत की विकास दर कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर, 2030 तक 5 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी का सपना खिसक सकता है
कच्चे तेल की कीमतों पर टिकी भारत के विकास की रफ्तार, 2030 तक खिसक सकता है 5 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी का सपना
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भारत की विकास दर वित्त वर्ष 2026-27 में कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर करेगी। एसबीआइ रिसर्च के अनुसार, अगर कच्चे तेल की कीमतें 90 डॉलर प्रति बैरल पर रहती हैं, तो विकास दर 6.8 प्रतिशत रहेगी, लेकिन 130 डॉलर पर यह घटकर 6 प्रतिशत हो जाएगी।
- 01कच्चे तेल की कीमतें भारत की विकास दर को प्रभावित करेंगी।
- 0290 डॉलर प्रति बैरल पर विकास दर 6.8 प्रतिशत, 130 डॉलर पर 6 प्रतिशत तक गिर सकती है।
- 03भारत अपनी जरूरत का 88 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है।
- 04अगर रुपया 95 पर स्थिर रहता है, तो भारतीय अर्थव्यवस्था 4.04 ट्रिलियन डॉलर रह जाएगी।
- 05महंगे क्रूड से महंगाई दर में वृद्धि का खतरा है।
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भारत की विकास दर वित्त वर्ष 2026-27 में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर करेगी। एसबीआइ रिसर्च की रिपोर्ट के अनुसार, यदि कच्चे तेल की कीमत 90 डॉलर प्रति बैरल पर बनी रहती है, तो विकास दर 6.8 प्रतिशत रहेगी। वहीं, अगर कीमतें 130 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच जाती हैं, तो विकास दर घटकर 6 प्रतिशत हो जाएगी। वर्तमान में, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 104-105 डॉलर प्रति बैरल हैं। भारत अपनी जरूरत का 88 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है, जिससे इसकी कीमतों का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि अगर रुपया 95 के स्तर पर स्थिर रहता है, तो भारतीय अर्थव्यवस्था का आकार 4.04 ट्रिलियन डॉलर रह जाएगा, जिससे 2030 तक 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का सपना खिसक सकता है। महंगे कच्चे तेल से महंगाई दर भी बढ़ने की संभावना है, जिससे ब्याज दरों में वृद्धि की संभावना बढ़ जाएगी।
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महंगे कच्चे तेल से भारत की अर्थव्यवस्था कमजोर हो सकती है, जिससे आम लोगों की जीवनशैली पर असर पड़ेगा।
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