बंगाल विधानसभा में कुड़माली अनुवादक की कमी से विधायकों का शपथ ग्रहण रुका
बंगाल विधानसभा में कुड़माली अनुवादक न होने से 5 विधायकों का शपथ ग्रहण अटका, समुदाय में नाराजगी
Jagran
Image: Jagran
बंगाल विधानसभा में कुड़माली भाषा को आधिकारिक मान्यता मिलने के बावजूद अनुवादक की कमी के कारण पांच भाजपा विधायकों का शपथ ग्रहण अटका है। विधायकों ने कुड़माली में शपथ लेने की मांग की है, जिससे कुड़मी समुदाय में नाराजगी उत्पन्न हुई है।
- 01कुड़माली भाषा को आधिकारिक मान्यता मिली है, लेकिन अनुवादक की कमी है।
- 02पांच भाजपा विधायक कुड़माली में शपथ लेना चाहते हैं।
- 03सचिवालय ने केवल कुछ भाषाओं में से चयन करने को कहा है।
- 04कुड़मी समुदाय के नेता ने अनुवादक नियुक्त करने की मांग की है।
- 05भाषा की मान्यता के साथ संस्थागत ढांचे की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।
Advertisement
In-Article Ad
बंगाल विधानसभा में कुड़माली भाषा को आधिकारिक मान्यता मिलने के बावजूद, विधानसभा सचिवालय में अनुवादक की अनुपस्थिति के कारण पांच भाजपा विधायकों का शपथ ग्रहण संकट में है। ये विधायक जंगलमहल क्षेत्र से हैं और कुड़माली में शपथ लेना चाहते हैं, लेकिन सचिवालय ने उन्हें केवल बंगाली, हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू और संथाली में से किसी एक भाषा का चयन करने को कहा है। इससे विधायकों और कुड़मी समुदाय में नाराजगी फैल गई है। कुड़मी समाज के नेता अजीत प्रसाद महतो ने अनुवादक की नियुक्ति की मांग की है, यह कहते हुए कि 2018 में जब कुड़माली को मान्यता दी गई थी, तब से अनुवादक की व्यवस्था न होना सरकारी दावों पर सवाल उठाता है। विधायकों ने सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी व्यक्त की है और पूर्व सरकार पर केवल घोषणाएं करने का आरोप लगाया है। यह विवाद एक बार फिर इस बात को उजागर करता है कि केवल भाषा को मान्यता देना ही काफी नहीं है, बल्कि उसके प्रभावी उपयोग के लिए संस्थागत ढांचे की भी आवश्यकता है।
Advertisement
In-Article Ad
इस विवाद से कुड़मी समुदाय की भावनाएं प्रभावित हो रही हैं और यह उनकी पहचान और अधिकारों के लिए महत्वपूर्ण है।
Advertisement
In-Article Ad
Reader Poll
क्या आपको लगता है कि कुड़माली भाषा के लिए अनुवादक की नियुक्ति होनी चाहिए?
Connecting to poll...
मूल लेख पढ़ें
पूरी कहानी के लिए मूल स्रोत पर जाएं।




