इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रियल एस्टेट विवाद में एफआईआर रद्द की
लेनदेन का विवाद दीवानी मामला, आपराधिक रंग दे अदालत को न बनाएं वसूली का जरिया : कोर्ट

Image: Amar Ujala
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रियल एस्टेट लेनदेन विवाद में एफआईआर को रद्द करते हुए कहा कि यह मामला सिविल है और इसे आपराधिक रंग नहीं देना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि ऐसे विवादों के लिए रेरा और मध्यस्थता के विकल्प उपलब्ध हैं।
- 01इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रियल एस्टेट विवाद में एफआईआर रद्द की।
- 02कोर्ट ने कहा कि भूमि खरीद-फरोख्त का मामला सिविल है, न कि आपराधिक।
- 03याचियों ने दावा किया कि शिकायतकर्ता ने जानबूझकर मामला आपराधिक बनाया।
- 04कोर्ट ने रेरा और मध्यस्थता जैसे विधिक मंचों का उल्लेख किया।
- 05व्यावसायिक लेनदेन में धोखाधड़ी की नीयत साबित होना आवश्यक है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में रियल एस्टेट से जुड़े लेनदेन के विवाद में दर्ज एफआईआर को रद्द कर दिया है। न्यायमूर्ति चंद्रधारी सिंह और न्यायमूर्ति देवेंद्र सिंह की खंडपीठ ने कहा कि यह मामला पूरी तरह से सिविल (दीवानी) है और इसे आपराधिक रंग देकर अदालत को वसूली का जरिया नहीं बनाया जाना चाहिए। याचियों ने इस मामले में यह तर्क दिया कि शिकायतकर्ता डॉ. गुरप्रीत सिंह ने जानबूझकर विवाद को आपराधिक रूप में प्रस्तुत किया, जबकि यह एक व्यावसायिक लेनदेन का मामला है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसे विवादों के निपटारे के लिए रेरा (रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी) और मध्यस्थता जैसे वैकल्पिक विधिक मंच मौजूद हैं। याचियों के खिलाफ शिकायत में आरोप लगाया गया था कि उन्हें तय मासिक रिटर्न नहीं मिलने पर एक अतिरिक्त दुकान का वादा किया गया था, जो पूरा नहीं हुआ। कोर्ट ने कहा कि व्यावसायिक विफलता को अपराध नहीं माना जा सकता जब तक धोखाधड़ी की नीयत साबित न हो।
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इस निर्णय से रियल एस्टेट विवादों में कानूनी प्रक्रिया का सही उपयोग सुनिश्चित होगा।
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