मुजफ्फरपुर में एईएस पर नियंत्रण: पड़ोसी जिलों की लापरवाही बनी चुनौती
मुजफ्फरपुर में एईएस पर ऐतिहासिक नियंत्रण, पड़ोसी जिलों की लापरवाही बनी चुनौती
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मुजफ्फरपुर, बिहार में एईएस (एक्यूट एनसेफ्लाइटिस सिंड्रोम) पर प्रभावी नियंत्रण पाया गया है, जिससे पिछले तीन वर्षों में बच्चों की मौत का आंकड़ा शून्य हो गया है। हालाँकि, पड़ोसी जिलों शिवहर और सीतामढ़ी में लापरवाही के कारण स्वास्थ्य विभाग की चिंताएँ बढ़ गई हैं।
- 01मुजफ्फरपुर में एईएस से मौत का आंकड़ा शून्य हो गया है।
- 02पड़ोसी जिलों में इलाज में लापरवाही से स्थिति बिगड़ रही है।
- 03नीतीश कुमार की पहल से एईएस पर नियंत्रण संभव हुआ।
- 04जागरूकता अभियान से अभिभावक बच्चों को समय पर अस्पताल ले जा रहे हैं।
- 05सामूहिक प्रयासों से एईएस पर प्रभावी नियंत्रण प्राप्त हुआ है।
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मुजफ्फरपुर, बिहार में एईएस (एक्यूट एनसेफ्लाइटिस सिंड्रोम) पर नियंत्रण पाया गया है, जिससे पिछले तीन वर्षों में बच्चों की मौत का आंकड़ा शून्य हो गया है। वर्ष 2000 से 2021 के बीच, इस बीमारी के कारण हर गर्मी में कई बच्चों की जानें जाती थीं। लेकिन अब स्थिति में सुधार हुआ है। हालांकि, पड़ोसी जिलों शिवहर और सीतामढ़ी में इलाज में लापरवाही के मामले सामने आए हैं, जिससे स्वास्थ्य विभाग की चिंताएँ बढ़ गई हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर इलाज की कमी से बच्चों की तबीयत गंभीर हो रही है। तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पहल के बाद एईएस पर प्रभावी नियंत्रण संभव हुआ, जिसमें विशेषज्ञ टीमों का गठन और उपचार प्रोटोकॉल लागू किया गया। जागरूकता अभियानों के माध्यम से अब अभिभावक बच्चों को सीधे अस्पताल ले जा रहे हैं, जिससे स्थिति में सुधार आया है। सामूहिक प्रयासों से एईएस पर नियंत्रण में सफलता मिली है।
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बच्चों की स्वास्थ्य स्थिति में सुधार हुआ है, जिससे अभिभावक अब समय पर अस्पताल पहुंचा रहे हैं।
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