दिल्ली AIIMS में 18 साल बाद सफल पैंक्रियाज-किडनी ट्रांसप्लांट
दिल्ली AIIMS में 18 साल बाद पैंक्रियाज-किडनी ट्रांसप्लांट, ब्रेन डेड डोनर ने 20 साल पुराने दर्द से दिलाई मुक्ति
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एम्स, नई दिल्ली में ब्रेन डेड डोनर से 35 वर्षीय युवक को पैंक्रियाज और किडनी का ट्रांसप्लांट किया गया। यह सर्जरी 18 वर्षों में पहली बार हुई है, जिससे मरीज की स्वास्थ्य स्थिति में सुधार हुआ है। इस प्रक्रिया में ग्रीन कॉरिडोर का उपयोग कर अंगों को जल्दी पहुंचाया गया।
- 01यह ट्रांसप्लांट 18 वर्षों में पहली बार हुआ है।
- 02सर्जरी के बाद मरीज को डायलिसिस की आवश्यकता नहीं है।
- 03पैंक्रियाज ट्रांसप्लांट मुख्य रूप से टाइप-वन डायबिटीज और किडनी फेल्योर वाले मरीजों के लिए किया जाता है।
- 04ग्रीन कॉरिडोर के माध्यम से अंगों को तेजी से एम्स पहुंचाया गया।
- 05इस प्रक्रिया में कई चिकित्सा संस्थानों और संगठनों का सहयोग रहा।
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एम्स, नई दिल्ली में 18 वर्षों के बाद एक साथ पैंक्रियाज और किडनी का ट्रांसप्लांट किया गया, जिससे 35 वर्षीय युवक को नया जीवन मिला। इस सर्जरी में शामिल चिकित्सकों ने बताया कि मरीज की हृदय की क्षमता केवल 25 प्रतिशत थी, जिससे मामला चुनौतीपूर्ण हो गया था। सर्जरी के बाद मरीज का ब्लड शुगर और क्रिएटिनिन स्तर सामान्य हो गया है, और अब उसे डायलिसिस की आवश्यकता नहीं है। यह ट्रांसप्लांट प्रक्रिया ढाई घंटे चली और मरीज को दो सप्ताह बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। एम्स में पिछले 18 वर्षों में यह तीसरा ट्रांसप्लांट है। पैंक्रियाज ट्रांसप्लांट मुख्य रूप से टाइप-वन डायबिटीज और किडनी फेल्योर वाले मरीजों के लिए किया जाता है, जिससे मरीज की इंसुलिन की आवश्यकता 90 से 95 प्रतिशत तक कम हो जाती है। इस प्रक्रिया में ग्रीन कॉरिडोर का उपयोग कर अंगों को रोहतक से एम्स तक तेजी से पहुंचाया गया।
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यह ट्रांसप्लांट प्रक्रिया मरीजों के लिए नई आशा लेकर आई है, खासकर उन लोगों के लिए जो टाइप-वन डायबिटीज और किडनी फेल्योर से जूझ रहे हैं।
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