भारत में विवाहित महिलाओं की घरेलू निर्णय लेने में बढ़ती भागीदारी
खरीदारी, सेहत और फैमिली यात्राओं में ले रहीं बढ़-चढ़कर हिस्सा; घरेलू फैसलों में बढ़ी शादीशुदा महिलाओं की भागीदारी
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भारत में विवाहित महिलाओं की घरेलू निर्णय लेने में भागीदारी 89% तक पहुंच गई है, जो पिछले सर्वेक्षणों की तुलना में वृद्धि दर्शाती है। आर्थिक आत्मनिर्भरता में सुधार के साथ, महिलाओं के बैंक खातों का उपयोग 89% हो गया है। हालांकि, स्थायी गर्भनिरोधक उपायों में पुरुषों की भागीदारी बेहद कम है।
- 01राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 के अनुसार, विवाहित महिलाओं की घरेलू निर्णय लेने में भागीदारी 89% है।
- 02महिलाओं के बैंक खातों का उपयोग 89% तक बढ़ गया है, जो आर्थिक आत्मनिर्भरता को दर्शाता है।
- 03गर्भनिरोधक तरीकों का उपयोग विवाहित महिलाओं में 69.1% तक पहुंच गया है।
- 04महिला नसबंदी का आंकड़ा 36.5% है, जबकि पुरुष नसबंदी मात्र 0.5% है।
- 05विवाहित महिलाओं में परिवार नियोजन की अनमेट नीड 8.5% पाई गई है।
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भारत में विवाहित महिलाओं की घरेलू निर्णय लेने में भागीदारी पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ी है, जो राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 के आंकड़ों से स्पष्ट है। लगभग 89% महिलाएं स्वास्थ्य देखभाल, घर की बड़ी खरीदारी और रिश्तेदारों से मिलने-जुलने जैसे महत्वपूर्ण निर्णयों में शामिल हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में यह आंकड़ा 88% और शहरी क्षेत्रों में 91.4% है। आर्थिक आत्मनिर्भरता में भी सुधार हुआ है, जहां महिलाओं के बैंक खातों का उपयोग 89% तक पहुंच गया है। हालांकि, स्थायी गर्भनिरोधक उपायों में पुरुषों की भागीदारी बेहद कम है, जहां महिला नसबंदी का आंकड़ा 36.5% है और पुरुष नसबंदी मात्र 0.5% है। इसके अलावा, विवाहित महिलाओं में परिवार नियोजन की अनमेट नीड 8.5% पाई गई है, जो ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक है।
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महिलाओं की बढ़ती भागीदारी घरेलू निर्णयों में उनके अधिकारों और आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रही है।
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