प्रहलाद की भक्ति पर आधारित श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन
Panipat News: प्रहलाद जैसी निस्वार्थ और सच्ची भक्ति का दिया संदेश

Image: Amar Ujala
पानीपत में प्रेम मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन कथाव्यास कांता देवी महाराज ने प्रहलाद की निस्वार्थ भक्ति का संदेश दिया। कथा में शुकदेव जी के जन्म और भगवान कृष्ण के साथ उनके संबंधों का उल्लेख किया गया। कथा का समापन भजन-कीर्तन और प्रसाद वितरण के साथ हुआ।
- 01कथा में प्रहलाद की निस्वार्थ भक्ति को भगवान नरसिंह द्वारा आशीर्वाद दिया गया।
- 02कथाव्यास कांता देवी महाराज ने शुकदेव जी के जन्म और माया से मुक्ति की कहानी सुनाई।
- 03भगवान कृष्ण ने शुकदेव को आश्वासन दिया कि माया उन्हें स्पर्श नहीं करेगी।
- 04कथा के अंत में वामन अवतार का भी उल्लेख किया गया।
- 05भजन-कीर्तन के बाद सभी को प्रसाद वितरित किया गया।
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पानीपत के प्रेम मंदिर में चल रही साप्ताहिक श्रीमद्भागवत कथा का तीसरा दिन शुक्रवार को मनाया गया। कथाव्यास कांता देवी महाराज ने कथा में प्रहलाद की निस्वार्थ और सच्ची भक्ति का संदेश दिया। उन्होंने बताया कि भगवान नरसिंह ने प्रहलाद की भक्ति से प्रसन्न होकर उन्हें आशीर्वाद दिया कि उनके जैसे भक्त के कारण उनके कुल के इक्कीस पीढ़ियों तक के पूर्वजों की आत्मा का उद्धार होगा। कथा में शुकदेव जी के जन्म की कहानी भी सुनाई गई, जिसमें बताया गया कि वे 12 वर्षों तक अपनी माता के गर्भ में रहे और भगवान कृष्ण के आश्वासन पर बाहर आए। शुकदेव जी ने वेदव्यास के पास जाकर श्रीमद्भागवत का अध्ययन किया और राजा परीक्षित को कथा सुनाकर उनका उद्धार किया। कथा के समापन पर ब्रह्मकुमारी बहनों और महिला मंडली ने भजन-कीर्तन किया, जिसमें भगवान की महिमा का वर्णन किया गया। सभी भक्तों को प्रसाद भी वितरित किया गया।
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यह कथा स्थानीय समुदाय में धार्मिक जागरूकता और भक्ति का संचार करती है।
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