झारखंड में पेंशन घोटाले का खुलासा: 31% मामलों में गायब PPO नंबर
झारखंड पेंशन घोटाला या लापरवाही? 31% मामलों में गायब मिला PPO नंबर, डाटा मिलान में खुली पोल
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झारखंड में पेंशनरों को 11 करोड़ रुपये का अधिक भुगतान होने का मामला सामने आया है, जिसमें 31.26% लेन-देन में पेंशन पेमेंट ऑर्डर (PPO) गायब पाया गया। महालेखाकार कार्यालय ने 1.29 लाख लेन-देन का नमूना जांचा, जिसमें 344 मामलों में अनियमितताएँ सामने आईं।
- 0111 करोड़ रुपये का अधिक भुगतान पाया गया है।
- 02344 लेन-देन की जांच में 31.26% मामलों में PPO गायब मिला।
- 03ग्रेच्युटी मद में अधिकतम सीमा 20 लाख रुपये है।
- 04जांच में 1.29 लाख लेन-देन का नमूना लिया गया।
- 0529 ट्रेजरी से संबंधित सभी मामलों की जांच की गई।
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झारखंड में पेंशनरों को 11 करोड़ रुपये का अधिक भुगतान होने का मामला सामने आया है। महालेखाकार कार्यालय द्वारा की गई जांच में 344 लेन-देन की समीक्षा की गई, जिसमें 31.26% मामलों में पेंशन पेमेंट ऑर्डर (PPO) गायब पाया गया। नमूना जांच में 1.29 लाख लेन-देन का चयन किया गया, जिसमें ग्रेच्युटी और कम्यूटेड पेंशन के मामलों में अनियमितताएँ सामने आईं। राज्य सरकार ने ग्रेच्युटी मद में अधिकतम भुगतान की सीमा 20 लाख रुपये निर्धारित की है, लेकिन जांच में पाया गया कि कुछ पेंशनरों को इस सीमा से अधिक का भुगतान किया गया है। ये अनियमितताएँ झारखंड के 29 ट्रेजरी से संबंधित हैं, जिसमें रांची, बोकारो, चक्रधरपुर, सिमडेगा और जमशेदपुर ट्रेजरी शामिल हैं।
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यह घोटाला पेंशनरों के वित्तीय अधिकारों को प्रभावित कर सकता है और सरकार की पारदर्शिता पर सवाल उठाता है।
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