रुपये ने बनाया नया रिकॉर्ड निचला स्तर, जानें इसके कारण और भविष्यवाणी
रिकॉर्ड निचला स्तर... 96.14 पर पहुंचा 'रुपया', इन 3 कारणों से आई गिरावट; क्या और गिरेगा?
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भारतीय रुपये ने 15 मई को रिकॉर्ड निचले स्तर 96.14 पर पहुंच गया, जो कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, डॉलर की मजबूती और अमेरिकी नीति निर्माताओं के कड़े रुख के कारण हुआ। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक स्थिति स्थिर रहती है, तो रुपये का मूल्य 2026 के अंत तक 100 प्रति डॉलर तक पहुंच सकता है।
- 01रुपया 15 मई को 96.14 पर पहुंचा, जो रिकॉर्ड निचला स्तर है।
- 02कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि और डॉलर की मजबूती रुपये पर दबाव डाल रही है।
- 03अमेरिकी खुदरा बिक्री आंकड़ों में सुधार और मजबूत श्रम बाजार के कारण डॉलर की मांग बढ़ी है।
- 04LKP सिक्योरिटीज के जतिन त्रिवेदी ने 2026 तक रुपये के 100 प्रति डॉलर तक पहुंचने की संभावना जताई।
- 05भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल आयात करता है, जिससे रुपये पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
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15 मई को भारतीय रुपये ने 96.14 के रिकॉर्ड निचले स्तर को छू लिया, जो कई कारकों का परिणाम है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, जो बढ़ते मध्य पूर्व तनाव के कारण हैं, रुपये के लिए एक महत्वपूर्ण दबाव बन गई हैं। भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल आयात करता है, जिससे आयात बिल में वृद्धि हो रही है। इसके अलावा, डॉलर की मजबूती भी रुपये की कमजोरी का कारण है। सीआर फॉरेक्स एडवाइजर्स के एमडी अमित पबारी ने बताया कि अमेरिकी खुदरा बिक्री और श्रम बाजार के आंकड़ों में सुधार से डॉलर की मांग बढ़ी है, जिससे भारतीय रुपये पर दबाव बना है। LKP सिक्योरिटीज के जतिन त्रिवेदी ने चेतावनी दी है कि यदि मौजूदा वैश्विक स्थिति बनी रहती है, तो रुपये का मूल्य 2026 के अंत तक 100 प्रति डॉलर तक पहुंच सकता है।
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रुपये की गिरावट से आयातित वस्तुओं की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे आम लोगों के लिए जीवन यापन महंगा हो सकता है।
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