ग्रेच्युटी की गणना: जानें किस सैलरी पर होती है निर्भर
बेसिक सैलरी, ग्रॉस सैलरी या सीटीसी; किस के आधार पर बनती है Gratuity? इस सिंपल फॉर्मूला से कोई भी कर सकता है कैलकुलेट
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ग्रेच्युटी, जो लंबे समय तक एक ही कंपनी में काम करने पर मिलती है, केवल बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ते (DA) पर आधारित होती है। इसे कैलकुलेट करने का आसान फॉर्मूला है: (बेसिक सैलरी + DA) × 15 × सेवा के वर्ष / 26। यह जानकारी नौकरीपेशा लोगों के लिए महत्वपूर्ण है।
- 01ग्रेच्युटी की कैलकुलेशन केवल बेसिक सैलरी और DA पर होती है।
- 02ग्रेच्युटी पाने के लिए आमतौर पर 5 साल तक एक ही कंपनी में काम करना जरूरी है।
- 03कैलकुलेशन का फॉर्मूला: (बेसिक सैलरी + DA) × 15 × सेवा के वर्ष / 26।
- 04आंशिक वर्ष का 6 महीने से अधिक समय पूरा वर्ष माना जाता है।
- 05अगर कंपनी पेमेंट ऑफ ग्रेच्युटी एक्ट, 1972 के तहत नहीं आती, तो ग्रेच्युटी की गणना अलग तरीके से होती है।
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ग्रेच्युटी एक महत्वपूर्ण वित्तीय लाभ है जो नौकरीपेशा लोगों को लंबे समय तक एक ही कंपनी में काम करने पर मिलता है। यह राशि केवल बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ते (DA) के आधार पर निर्धारित होती है, न कि ग्रॉस सैलरी या CTC पर। भारत में ग्रेच्युटी का प्रावधान 'पेमेंट ऑफ ग्रेच्युटी एक्ट, 1972' के तहत आता है और इसके लिए आमतौर पर 5 साल की सेवा आवश्यक होती है। हालांकि, कुछ विशेष परिस्थितियों में, जैसे स्थायी विकलांगता या मृत्यु, इस नियम से छूट मिल सकती है। ग्रेच्युटी की गणना का सरल फॉर्मूला है: (बेसिक सैलरी + DA) × 15 × सेवा के वर्ष / 26। उदाहरण के लिए, यदि किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी + DA ₹20,000 प्रति माह है और उसने 7 साल काम किया है, तो उसकी ग्रेच्युटी लगभग ₹80,769 होगी। आंशिक वर्ष का समय 6 महीने से अधिक होने पर पूरा वर्ष माना जाता है। यदि कोई कंपनी पेमेंट ऑफ ग्रेच्युटी एक्ट, 1972 के तहत नहीं आती, तो ग्रेच्युटी की गणना अलग तरीके से की जाती है।
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ग्रेच्युटी की सही गणना जानने से कर्मचारी अपने भविष्य की वित्तीय योजना बेहतर बना सकते हैं।
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