कर्जदारों के अधिकार: लोन वसूली के दौरान कानूनी सुरक्षा उपाय
लोन या क्रेडिट कार्ड बिल वसूली की धमकी मिले, बदसलूकी हो तो क्या करें, कर्जदार के क्या हैं अधिकार, कानून के एक्सपर्ट से जानें

Image: Ndtv
भारत में कर्जदारों को लोन वसूली के दौरान कानूनी सुरक्षा प्राप्त है। यदि कोई कर्जदार किस्त या क्रेडिट कार्ड बिल का भुगतान नहीं कर पाता है, तो बैंक केवल कानूनी तरीकों से वसूली कर सकते हैं। धमकी, मारपीट या अपमान करना अवैध है और ऐसे मामलों में कर्जदार विभिन्न कानूनी उपायों का सहारा ले सकते हैं।
- 01बैंक और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों को कर्ज वसूली के लिए केवल कानूनी तरीकों का पालन करना चाहिए।
- 02कर्जदार के घर जाकर वसूली करना कानूनी है, लेकिन बल प्रयोग या धमकी देना अवैध है।
- 03कर्जदार उत्पीड़न की शिकायत आरबीआई लोकपाल योजना, कंज्यूमर फोरम या मानवाधिकार आयोग में दर्ज कर सकते हैं।
- 04सुप्रीम कोर्ट ने वसूली एजेंटों द्वारा उत्पीड़न की कड़ी आलोचना की है और कानूनी तरीकों का पालन करने का निर्देश दिया है।
- 05कर्जदार को मानसिक उत्पीड़न या अनुचित व्यापार प्रथाओं के लिए मुआवजे की मांग का अधिकार है।
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भारत में कर्जदारों की सुरक्षा के लिए कई कानूनी उपाय उपलब्ध हैं। जब कोई व्यक्ति लोन या क्रेडिट कार्ड का भुगतान नहीं कर पाता है, तो बैंक और अन्य वित्तीय संस्थाएं केवल कानूनी तरीकों से वसूली कर सकते हैं। दिल्ली हाईकोर्ट के वकील वरुण दीक्षित के अनुसार, कर्जदार को धमकाना, मारपीट करना या अपमानित करना अवैध है। यदि वसूली एजेंट कर्जदार के घर जाते हैं, तो उन्हें सभ्य और पेशेवर तरीके से व्यवहार करना चाहिए। यदि कोई कर्जदार उत्पीड़न का सामना करता है, तो वह आरबीआई लोकपाल योजना, कंज्यूमर फोरम या मानवाधिकार आयोग में शिकायत कर सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने भी वसूली एजेंटों द्वारा कर्जदारों को डराने-धमकाने की निंदा की है और स्पष्ट किया है कि वसूली केवल कानूनी तरीकों से ही की जानी चाहिए। इस प्रकार, कर्जदारों के पास अपने अधिकारों की रक्षा के लिए कई विकल्प उपलब्ध हैं।
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कर्जदारों को वसूली के दौरान कानूनी अधिकारों का ज्ञान होना आवश्यक है ताकि वे उत्पीड़न से बच सकें।
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