जैन पिता-पुत्र की अदालती लड़ाई: हिंदू पक्ष के 'धर्म योद्धा' भोजशाला विवाद में
अयोध्या से ज्ञानवापी-भोजशाला तक...अदालतों में हिंदू पक्ष की आवाज बने जैन पिता-पुत्र, जानिए कौन हैं कोर्ट रूम के ‘धर्म योद्धा’
Nbt NavbharattimesImage: Nbt Navbharattimes
भोपाल में, जैन पिता-पुत्र, हरिशंकर और विष्णु शंकर जैन, हिंदू पक्ष की पैरवी करते हुए अयोध्या, ज्ञानवापी और भोजशाला जैसे विवादों में प्रमुखता से उभरे हैं। भोजशाला मामले में उनकी जीत के बाद, सोशल मीडिया पर उन्हें 'हीरो' माना जा रहा है। दोनों ने 100 से अधिक हाई प्रोफाइल धार्मिक विवादों में वकालत की है।
- 01हरिशंकर जैन ने 1976 में वकालत शुरू की और अयोध्या आंदोलन में सक्रिय रहे।
- 02विष्णु शंकर जैन ने 2010 में कानून की डिग्री प्राप्त की और अपने पिता का साथ देना शुरू किया।
- 03भोजशाला विवाद में 2 मई 2022 को इंदौर उच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई थी।
- 04पिता-पुत्र की जोड़ी ने 1991 के वर्शिप एक्ट की वैधता को चुनौती दी है।
- 05सोशल मीडिया पर उन्हें 'सनातन रत्न' और 'भारत माता का सपूत' कहा जा रहा है।
Advertisement
In-Article Ad
भोपाल में, वरिष्ठ अधिवक्ता हरिशंकर जैन (72 वर्ष) और उनके पुत्र विष्णु शंकर जैन (40 वर्ष) ने हिंदू धार्मिक स्थलों से जुड़े कई विवादों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अयोध्या, ज्ञानवापी और हाल ही में भोजशाला विवाद में उनकी पैरवी ने उन्हें 'धर्म योद्धा' का दर्जा दिलाया है। भोजशाला विवाद में हिंदू पक्ष की जीत के बाद, विष्णु शंकर जैन को सोशल मीडिया पर 'हीरो' माना जा रहा है। हरिशंकर जैन ने 1976 में वकालत शुरू की और अयोध्या आंदोलन में सक्रिय रहे, जबकि विष्णु शंकर जैन ने 2010 में कानून की डिग्री प्राप्त की। दोनों ने 100 से अधिक हाई प्रोफाइल धार्मिक विवादों में वकालत की है। भोजशाला मामले में 2 मई 2022 को इंदौर उच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई थी, जिसके परिणामस्वरूप हाल ही में ऐतिहासिक फैसला आया है। उनके काम को लेकर सोशल मीडिया पर उन्हें 'सनातन रत्न' और 'भारत माता का सपूत' जैसे उपाधियों से नवाजा जा रहा है।
Advertisement
In-Article Ad
इस निर्णय से हिंदू समुदाय के लिए धार्मिक स्थलों पर पूजा के अधिकारों की सुरक्षा को लेकर सकारात्मक संकेत मिलते हैं।
Advertisement
In-Article Ad
Reader Poll
क्या आपको लगता है कि धार्मिक स्थलों के लिए कानूनी लड़ाई जरूरी है?
Connecting to poll...
मूल लेख पढ़ें
पूरी कहानी के लिए मूल स्रोत पर जाएं।



