झारखंड में खनन उद्योग पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, 70% क्रशर उद्योग संकट में
झारखंड में खनन संकट: हाईकोर्ट के आदेश से 70% माइंस-क्रशर पर लटकी बंदी की तलवार, हजारों बेरोजगार होंगे
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झारखंड, भारत में उच्च न्यायालय के हालिया आदेश से लगभग 70% खनन-क्रशर उद्योगों पर बंदी की तलवार लटक गई है। यह आदेश 2015 में गठित एनओसी विशेषज्ञ कमेटी की वैधता को खारिज करता है, जिससे हजारों श्रमिक बेरोजगार हो सकते हैं और सरकार को राजस्व की हानि होगी।
- 01हाईकोर्ट ने 2015 की एनओसी विशेषज्ञ कमेटी को अवैध माना।
- 02खनन और क्रशर यूनिट की दूरी बढ़ाकर 400 और 500 मीटर की गई।
- 0370% खनन-क्रशर उद्योग बंद होने का खतरा।
- 04हजारों श्रमिक बेरोजगार हो सकते हैं।
- 05राज्य सरकार को राजस्व की हानि का सामना करना पड़ सकता है।
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झारखंड, भारत में उच्च न्यायालय ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है, जिसके तहत लगभग 70% खनन-क्रशर उद्योगों पर बंदी की तलवार लटक रही है। उच्च न्यायालय ने 2015 में गठित एनओसी विशेषज्ञ कमेटी को विशेषज्ञ नहीं मानते हुए उसके द्वारा जारी गजट को अवैध करार दिया है। इसके परिणामस्वरूप, खनन और क्रशर यूनिट की दूरी को 400 मीटर और 500 मीटर निर्धारित किया गया है। इस आदेश का सीधा प्रभाव उन हजारों श्रमिकों पर पड़ेगा, जो इस उद्योग से जुड़े हुए हैं। व्यवसायियों का कहना है कि इससे राज्य के लगभग 70% खनन-क्रशर उद्योग बंद हो जाएंगे, जिससे हजारों लोग बेरोजगार हो जाएंगे। इसके अलावा, राज्य सरकार को भी राजस्व की हानि का सामना करना पड़ेगा। झारखंड राज्य पत्थर उद्योग संघ के अध्यक्ष सीपी सिन्हा और सचिव पंकज सिंह ने इस आदेश को लेकर चिंता व्यक्त की है और मुख्यमंत्री से मिलने की योजना बनाई है ताकि इस मामले का समाधान निकाला जा सके।
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इस आदेश के कारण खनन-क्रशर उद्योग में काम करने वाले हजारों श्रमिक बेरोजगार हो सकते हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति प्रभावित होगी।
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