गुजरात हाई कोर्ट ने पिता को बच्चों के भरण-पोषण की जिम्मेदारी निभाने का दिया आदेश
'लोन-EMI भरते हैं तो क्या बच्चों की देखभाल नहीं करेंगे', गुजरात हाई कोर्ट ने पिता को लगाई फटकार,एक आदेश भी दिया
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गुजरात हाई कोर्ट ने एक पिता को आदेश दिया है कि वह अपने तीन बच्चों को हर महीने 3,000 रुपये भरण-पोषण के लिए दे। अदालत ने कहा कि पिता को अपने लोन या EMI के भुगतान से बच्चों की देखभाल की जिम्मेदारी से नहीं बचना चाहिए।
- 01गुजरात हाई कोर्ट ने पिता को बच्चों के भरण-पोषण के लिए 3,000 रुपये प्रति बच्चा देने का आदेश दिया।
- 02पिता की मासिक आय लगभग 14,800 रुपये है, जबकि उसकी दूसरी पत्नी के लिए भी कर्ज चुकता करना है।
- 03अदालत ने कहा कि बच्चों के पालन-पोषण की जिम्मेदारी किसी भी कर्ज से कम नहीं हो सकती।
- 04मां ने बच्चों के लिए 13,500 रुपये मासिक खर्च का विवरण पेश किया।
- 05पिता को अपनी आय का अनुपातिक बंटवारा करना होगा जिसमें सभी बच्चों का ध्यान रखा जाएगा।
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गुजरात हाई कोर्ट ने एक पिता को अपने तीन बच्चों के भरण-पोषण के लिए हर महीने 3,000 रुपये देने का आदेश दिया है। अदालत ने कहा कि भले ही पिता लोन या EMI का भुगतान कर रहा हो, लेकिन वह बच्चों की देखभाल की जिम्मेदारी से नहीं बच सकता। जस्टिस गीता गोपी की अदालत ने पाया कि पिता की मासिक आय 14,800 रुपये है और वह अपनी दूसरी पत्नी के लिए भी कर्ज चुका रहा है। अदालत ने कहा कि बच्चों के लिए भरण-पोषण की जिम्मेदारी किसी भी प्रकार के कर्ज से कम नहीं हो सकती। मां ने अदालत में यह बताया कि बच्चों के रहने और स्कूल की फीस सहित कुल खर्च 13,500 रुपये प्रति माह है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि पिता को अपनी आय का अनुपातिक बंटवारा करना होगा, जिसमें उसके सभी बच्चे शामिल होंगे।
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इस निर्णय से बच्चों के भरण-पोषण की जिम्मेदारी को लेकर स्पष्टता आई है, जिससे बच्चों की जरूरतों को प्राथमिकता दी जाएगी।
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