सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: लंबित वैवाहिक मुकदमे समाप्त करने की आवश्यकता
'जबरदस्ती के रिश्ते से कर दो आजाद', कोर्ट में लंबे समय से चल रहे वैवाहिक मुकदमों पर SC का फैसला
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Image: Jagran
सुप्रीम कोर्ट ने 15 साल से अलग रह रहे दंपत्ति के मामले में कहा कि लंबे समय तक वैवाहिक मुकदमे चलने से सामाजिक और मानसिक समस्याएं उत्पन्न होती हैं। कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 का उपयोग करते हुए शादी को समाप्त करने का आदेश दिया, जिससे दंपत्ति को जबरदस्ती के रिश्ते से मुक्ति मिली।
- 01सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लंबे समय तक वैवाहिक मुकदमे चलने से केवल कागजों पर शादी बनी रहती है।
- 02कोर्ट ने 15 साल से अलग रह रहे दंपत्ति की शादी को समाप्त करने का निर्णय लिया।
- 03शारीरिक संबंध बनाने से इनकार करना मानसिक क्रूरता माना गया है।
- 04दंपत्ति दोनों डॉक्टर हैं और उनके कोई बच्चे नहीं हैं।
- 05कोर्ट ने कहा कि शादी एक सामाजिक साझेदारी है, न कि केवल व्यक्तिगत अधिकारों का अनुबंध।
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सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा कि लंबे समय से चल रहे वैवाहिक मुकदमे समाज और व्यक्तियों के लिए हानिकारक हैं। कोर्ट ने 15 साल से अलग रह रहे एक दंपत्ति की शादी को समाप्त करते हुए कहा कि ऐसे मामलों में पक्षों को जबरदस्ती के रिश्ते से मुक्त किया जाना चाहिए। न्यायालय ने यह भी कहा कि वैवाहिक संबंध को बेवजह खींचने से मानसिक और सामाजिक समस्याएं उत्पन्न होती हैं। इस मामले में, पति और पत्नी दोनों डॉक्टर हैं और 2007 में शादी के बाद से अलग रह रहे हैं। कोर्ट ने यह भी माना कि शारीरिक संबंध बनाने से इनकार करना मानसिक क्रूरता है, जो शादी की बुनियाद को कमजोर करता है। कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 का उपयोग करते हुए इस शादी को समाप्त करने का आदेश दिया, जिससे दंपत्ति को एक नई शुरुआत करने का अवसर मिला।
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यह निर्णय उन दंपत्तियों के लिए महत्वपूर्ण है जो लंबे समय से वैवाहिक विवादों में फंसे हुए हैं।
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