रुपये में गिरावट: पहली बार 95.6 के पार, बाजार में घबराहट का कारण
Rupee Fall: रुपया पहली बार 95.6 के पार, आखिर क्यों बढ़ गई बाजार में घबराहट?
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भारतीय रुपया मंगलवार को डॉलर के मुकाबले 95.63 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया, जो अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का परिणाम है। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने भी बाजार में घबराहट को बढ़ाया है।
- 01रुपया पहली बार 95.63 के स्तर पर पहुंचा।
- 02अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने से बाजार में घबराहट।
- 03कच्चे तेल की कीमतों में 0.85% की वृद्धि।
- 04विदेशी निवेशकों ने 8,437 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।
- 05डॉलर इंडेक्स में 0.19% की वृद्धि ने भी रुपये पर दबाव डाला।
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भारतीय रुपया मंगलवार को डॉलर के मुकाबले 95.63 के स्तर पर पहुंच गया, जो इसके इतिहास में सबसे निचला स्तर है। यह गिरावट अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण हुई है। सोमवार को रुपये में 79 पैसे की गिरावट आई थी, जिससे यह 95.28 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतों में भी 0.85% की वृद्धि हुई, जिससे भारत पर असर पड़ा है क्योंकि वह अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के बयान ने बाजार में चिंता बढ़ाई है, जिसमें उन्होंने ईरान के साथ सीजफायर को 'लाइफ सपोर्ट' पर बताया। इसके अलावा, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने सोमवार को भारतीय शेयर बाजार से 8,437 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जिससे बाजार में और गिरावट आई। सेंसेक्स 525 अंक गिरकर 75,489 पर आ गया, जबकि निफ्टी 164 अंक गिरकर 23,651 के आसपास कारोबार कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तनाव जारी रहा और तेल की कीमतें ऊंची बनी रहीं, तो रुपये और बाजार पर दबाव बना रहेगा।
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रुपये की गिरावट और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से आम लोगों की जीवनशैली पर असर पड़ेगा, जैसे कि ईंधन की कीमतों में वृद्धि।
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