पारले की मेलोडी टॉफी: 60 हजार रुपये से शुरू होकर बनी 16 हजार करोड़ की कंपनी
12 कर्मचारी और 60 हजार रुपये से शुरू हुई थी मेलोडी बनाने वाली कंपनी, जानें PM के गिफ्ट पर CTI ने क्या कहा

Image: Ndtv
पारले की मेलोडी टॉफी, जो 1983 में लॉन्च हुई थी, अब 16 हजार करोड़ रुपये की कंपनी बन गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे इटली की प्रधानमंत्री मेलोनी को उपहार में दिया, जिससे स्वदेशी उत्पादों को अपनाने की प्रेरणा मिली। व्यापारी संगठन CTI ने इस कदम की सराहना की है।
- 01पारले कंपनी की स्थापना 1939 में हुई थी, और इसकी पहली उत्पाद पारले जी बिस्किट था।
- 02मेलोडी टॉफी का निर्माण 12 कर्मचारियों और 60 हजार रुपये की लागत से शुरू हुआ था।
- 03CTI के चेयरमैन ब्रजेश गोयल ने इसे स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री मोदी का मास्टर स्ट्रोक बताया।
- 04CTI महासचिव रमेश आहूजा ने कहा कि मेलोडी टॉफी के पीछे एक साधारण भारतीय व्यापारी का संघर्ष है।
- 05प्रधानमंत्री मोदी का उद्देश्य विदेशी उत्पादों के स्थान पर स्वदेशी उत्पादों को अपनाने के लिए लोगों को प्रेरित करना है।
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पारले की मेलोडी टॉफी, जो 1983 में भारतीय बाजार में उतारी गई थी, अब 16 हजार करोड़ रुपये की कंपनी बन चुकी है। इसकी शुरुआत 12 कर्मचारियों और 60 हजार रुपये की लागत से विले पारले में हुई थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में इस टॉफी को इटली की प्रधानमंत्री मेलोनी को उपहार में दिया, जिससे स्वदेशी उत्पादों को अपनाने की चर्चा शुरू हो गई। व्यापारी संगठन चैंबर आफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने इस कदम की सराहना की है। CTI के चेयरमैन ब्रजेश गोयल ने इसे प्रधानमंत्री मोदी का एक मास्टर स्ट्रोक बताया, जो स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित करता है। उन्होंने कहा कि मेलोडी टॉफी के पीछे एक साधारण भारतीय व्यापारी का संघर्ष है, जो इस उत्पाद को सफल बनाने में महत्वपूर्ण रहा। इसके अलावा, उन्होंने बताया कि डॉलर के मुकाबले रुपये की गिरावट को देखते हुए प्रधानमंत्री मोदी चाहते हैं कि लोग विदेशी उत्पादों का उपयोग कम करें और स्वदेशी उत्पादों को अपनाएं, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
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इस उपहार से स्वदेशी उत्पादों को अपनाने के लिए जागरूकता बढ़ेगी, जिससे भारतीय उत्पादों की मांग में वृद्धि हो सकती है।
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