CBSE ने COEMPT को फिर से दी जिम्मेदारी, OSM विवाद के बाद सुरक्षा में किए गए सुधार
CBSE ने फिर उसी कंपनी पर जताया भरोसा! OSM विवाद के बाद भी COEMPT को मिला बड़ा जिम्मा, जानिए वजह

Image: Zee News
सीबीएसई ने COEMPT Eduteck को ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम की री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया के लिए फिर से चुना है, जबकि सुरक्षा को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। 40 करोड़ पन्नों में से केवल 30 हजार में समस्याएं आई थीं, जिससे COEMPT को हटाने की आवश्यकता नहीं समझी गई।
- 01सीबीएसई ने COEMPT को री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया में स्कैनिंग का काम जारी रखने का निर्णय लिया है।
- 0240 करोड़ पन्नों की स्कैनिंग में केवल 30 हजार पन्नों में समस्याएं पाई गईं।
- 03सुरक्षा के लिए सभी OSM डेटा को CBSE के सर्वरों पर स्थानांतरित किया गया है।
- 04IIT कानपुर और IIT मद्रास के विशेषज्ञों ने OSM प्लेटफॉर्म की सुरक्षा जांच की।
- 053 जून को 38 लाख पैकेट वाले DoS हमले को सफलतापूर्वक रोका गया।
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सीबीएसई ने हाल ही में COEMPT Eduteck को अपने ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम की री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया के लिए फिर से जिम्मेदारी दी है, इसके बावजूद कि सुरक्षा संबंधी चिंताएं उठी थीं। बोर्ड ने 40 करोड़ पन्नों की स्कैनिंग में से केवल 30 हजार पन्नों में समस्याएं पाई, जो कि कुल काम का एक छोटा हिस्सा है। इसीलिए COEMPT को हटाने की आवश्यकता नहीं समझी गई। सुरक्षा को बढ़ाने के लिए, सभी OSM डेटा को CBSE के सर्वरों पर स्थानांतरित किया गया है और प्लेटफॉर्म के कोड में भी बदलाव किए गए हैं। CBSE ने IIT कानपुर और IIT मद्रास के विशेषज्ञों को OSM प्लेटफॉर्म की सुरक्षा की जांच करने के लिए नियुक्त किया, जिसमें 10 दिनों तक ऑडिट किया गया। इस दौरान COEMPT के इंजीनियरों ने तकनीकी सहायता प्रदान की। 3 जून को CBSE ने एक बड़े DoS हमले को सफलतापूर्वक रोका, जिससे डेटा लीक या ब्रीच का कोई प्रमाण नहीं मिला।
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सीबीएसई के OSM सिस्टम में सुधार से छात्रों के लिए री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया अधिक सुरक्षित और प्रभावी होगी।
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