सोमनाथ ज्योतिर्लिंग: महमूद गजनवी की आंखों में अद्भुत भारतीय इंजीनियरिंग
हवा में लटकता सोमनाथ ज्योतिर्लिंग ...भारत की ऐसी अद्भुत इंजीनियरिंग देख चक्कर खा गया था महमूद गजनवी
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सोमनाथ मंदिर का ज्योतिर्लिंग, जिसे महमूद गजनवी ने 1026 में आक्रमण के दौरान देखा था, अद्वितीय चुंबकीय तकनीक से लटकता था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंदिर के पुनर्निर्माण के 75 साल पूरे होने पर 'सोमनाथ अमृत महोत्सव' में भाग लिया, जिसमें भारतीय वास्तुकला और सांस्कृतिक पहचान की पुनर्स्थापना का जिक्र किया गया।
- 01सोमनाथ ज्योतिर्लिंग की अद्वितीय लटकने की तकनीक का जिक्र 13वीं सदी में हुआ था।
- 02महमूद गजनवी ने 1026 में सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण किया था, लेकिन ज्योतिर्लिंग को नुकसान नहीं पहुंचा सके।
- 03ज्योतिर्लिंग की संरचना में चुंबकीय सिद्धांत का उपयोग किया गया था।
- 04प्रधानमंत्री मोदी ने मंदिर के पुनर्निर्माण को भारत की सांस्कृतिक पहचान की पुनर्स्थापना का प्रतीक बताया।
- 05सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण केवल धार्मिक कार्य नहीं, बल्कि भारत की प्राचीन गरिमा को फिर से स्थापित करने का प्रयास है।
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सोमनाथ मंदिर का ज्योतिर्लिंग, जिसे महमूद गजनवी ने 1026 में आक्रमण के दौरान देखा था, अद्वितीय चुंबकीय तकनीक से लटकता था। इस तकनीक का उल्लेख 13वीं सदी के फारसी भूगोलवेत्ता जकारिया अल काजविनी ने किया था। उन्होंने बताया कि मंदिर की दीवारों और छत पर चुंबक लगे थे, जिससे ज्योतिर्लिंग हवा में लटकता रहा। महमूद गजनवी ने इस मंदिर पर विध्वंसक आक्रमण किया, लेकिन ज्योतिर्लिंग को नुकसान नहीं पहुंचा सके। पीएम नरेंद्र मोदी ने हाल ही में गुजरात के सोमनाथ मंदिर में 'सोमनाथ अमृत महोत्सव' में भाग लिया, जहां उन्होंने मंदिर के पुनर्निर्माण के 75 साल पूरे होने का जश्न मनाया। मोदी ने इसे भारत की सांस्कृतिक पहचान की पुनर्स्थापना का प्रतीक बताया। उन्होंने सरदार वल्लभभाई पटेल का भी उल्लेख किया, जिन्होंने भारत की एकता के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
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सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण और इसके ऐतिहासिक महत्व ने स्थानीय संस्कृति और पर्यटन को बढ़ावा दिया है।
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