सांची डेयरी: अमूल के सहकारी मॉडल से करोड़ों का देसी ब्रांड
अमूल की तर्ज पर कैसे खड़ा हुआ करोड़ों का यह देसी ब्रांड? पढ़ें सांची डेयरी का दिलचस्प सफर
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सांची डेयरी, मध्य प्रदेश का एक प्रमुख डेयरी ब्रांड, अमूल के सहकारी मॉडल पर आधारित है। 1970 के दशक में स्थापित, यह आज करोड़ों का टर्नओवर कर रहा है। सांची ने दूध और अन्य डेयरी उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार किया है और अब इसे बड़ी कंपनियों से प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है।
- 01सांची डेयरी की शुरुआत 1970 के दशक में मध्य प्रदेश में हुई थी, जब दुग्ध क्रांति का दौर चल रहा था।
- 02इसका सहकारी मॉडल किसानों को दूध का उचित मूल्य दिलाने पर केंद्रित है, जिसमें प्राथमिक दुग्ध सहकारी समितियां शामिल हैं।
- 03सांची का उत्पाद पोर्टफोलियो दूध के अलावा दही, पनीर, घी, आइसक्रीम और अन्य डेयरी उत्पादों तक फैला है।
- 04सांची के ब्रांड नाम और लोगो का संबंध सांची स्तूप से है, जो स्थानीय संस्कृति को दर्शाता है।
- 05सांची को अमूल और मदर डेयरी जैसी बड़ी कंपनियों से प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उसे गुणवत्ता और विपणन रणनीतियों को मजबूत करना होगा।
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सांची डेयरी, मध्य प्रदेश का एक प्रमुख डेयरी ब्रांड, 1970 के दशक में दुग्ध क्रांति के दौरान स्थापित हुआ था। यह अमूल के सहकारी मॉडल पर आधारित है, जिसका उद्देश्य किसानों को सीधे दूध का उचित मूल्य दिलाना है। सांची ने अपने उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार किया है और अब यह दूध के साथ-साथ दही, पनीर, घी, आइसक्रीम और अन्य डेयरी उत्पादों का उत्पादन करता है। सांची का नाम और लोगो सांची स्तूप से प्रेरित है, जो इसे स्थानीय संस्कृति से जोड़ता है। आज, सांची का टर्नओवर करोड़ों में है, लेकिन इसे अमूल और मदर डेयरी जैसी बड़ी कंपनियों से प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। सांची को अपने उत्पादों की गुणवत्ता बनाए रखने और विपणन रणनीतियों को मजबूत करने की आवश्यकता है ताकि वह अपने सहकारी मॉडल के तहत किसानों और उपभोक्ताओं के लिए एक विश्वसनीय ब्रांड बना रह सके।
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सांची डेयरी का सहकारी मॉडल मध्य प्रदेश के किसानों को सीधे लाभ पहुंचाता है, जिससे उन्हें दूध का उचित मूल्य मिलता है।
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