अफगानिस्तान के मददगारों की दुर्दशा: अमेरिका ने किया वादा तोड़ा
न घर के, न घाट के... अमेरिका के मददगारों से ट्रंप ने मुंह फेरा! 'नरक' में जीने को मजबूर हजारों अफगानी
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अफगानिस्तान में अमेरिकी सेना के सहयोगी हजारों लोग आज कुवैत के एक शेल्टर होम में फंसे हुए हैं। अमेरिका ने उन्हें शरण देने का वादा किया था, लेकिन अब उनकी स्थिति बदतर हो गई है। ट्रंप प्रशासन ने इन लोगों को कांगो भेजने की पेशकश की है, जिसे वे अस्वीकार कर रहे हैं।
- 01अफगानिस्तान में अमेरिकी सेना के सहयोगियों की दुर्दशा
- 02कुवैत के शेल्टर होम में 1100 लोग फंसे हैं
- 03अमेरिका ने शरण देने का वादा किया था, लेकिन मुकर गया
- 04ट्रंप प्रशासन ने कांगो भेजने की पेशकश की
- 05अफगानी परिवारों को वित्तीय सहायता की पेशकश, लेकिन वे लौटने को तैयार नहीं
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अफगानिस्तान में युद्ध के दौरान अमेरिका के लिए काम करने वाले हजारों अफगानियों की स्थिति बेहद दयनीय हो गई है। कुवैत के एक शेल्टर होम में लगभग 1100 लोग, जिनमें महिलाएं और बच्चे शामिल हैं, पिछले डेढ़ साल से फंसे हुए हैं। अमेरिका ने इन लोगों को शरण देने का वादा किया था, लेकिन अब उनकी स्थिति में सुधार नहीं हो रहा है। ट्रंप प्रशासन ने इन अफगानियों को कांगो भेजने की योजना बनाई है, जबकि ये लोग दूसरी जंग में नहीं फंसना चाहते। इसके अलावा, ट्रंप प्रशासन ने इनसे वापस अफगानिस्तान लौटने के लिए वित्तीय सहायता की पेशकश की है, जिसमें मुख्य आवेदकों को 4500 डॉलर और परिवार के सदस्यों को 1200 डॉलर दिए जाने का प्रस्ताव है। लेकिन अफगानी परिवार इस प्रस्ताव को ठुकरा रहे हैं, क्योंकि वे अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं।
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अफगानिस्तान के मददगारों की दुर्दशा से उनके परिवारों और समुदायों पर गहरा असर पड़ रहा है, जो उन्हें सुरक्षित भविष्य की तलाश में और भी कठिनाइयों का सामना करने पर मजबूर कर रहा है।
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