दक्षिण मुंबई में तरबूज में जहर मिलने की जांच में उलझन
मुंबई तरबूज कांड... आखिर फल में कैसे पहुंची चूहे मारने वाली दवा?
Aaj Tak
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दक्षिण मुंबई के डोकडिया परिवार के चार सदस्यों की मौत चूहे मारने वाली दवा जिंक फास्फाइड से हुई है। पुलिस जांच कर रही है कि यह जहर तरबूज में कैसे पहुंचा। प्रारंभिक जांच में घर में कोई संदिग्ध दवा नहीं मिली है।
- 01डोकडिया परिवार के चार सदस्यों की मौत जिंक फास्फाइड से हुई।
- 02पुलिस को घर में चूहों भगाने वाली हर्बल दवा मिली, जिसमें जहर नहीं था।
- 03जांच में हत्या या साजिश का कोई सबूत नहीं मिला है।
- 04मौत के समय परिवार ने चिकन पुलाव और तरबूज खाया था।
- 05FSL रिपोर्ट में मृतकों के अंगों में जिंक फास्फाइड की पुष्टि हुई।
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दक्षिण मुंबई के डोकडिया परिवार के चार सदस्यों की मौत जिंक फास्फाइड नामक चूहे मारने वाली दवा से हुई है। 26 अप्रैल की रात, परिवार ने चिकन पुलाव खाने के बाद तरबूज खाया और कुछ समय बाद फूड पॉइजनिंग के लक्षण दिखाई दिए। फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की रिपोर्ट में पुष्टि हुई है कि मृतकों के लीवर, किडनी और स्प्लीन में जिंक फास्फाइड पाया गया। हालांकि, पुलिस को घर से मिली हर्बल दवा में यह केमिकल नहीं था, जिससे सवाल उठता है कि यह जहर तरबूज में कैसे पहुंचा। पुलिस अब फोरेंसिक डॉक्टरों से पुनः परामर्श करेगी और जांच करेगी कि क्या तरबूज खरीदते समय या बाजार में ही जहर मिला था। परिवार पर कोई बड़ा कर्ज नहीं था और न ही किसी प्रकार की दुश्मनी का कोई सबूत मिला है।
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यह घटना स्थानीय समुदाय में सुरक्षा और खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता के प्रति जागरूकता बढ़ा सकती है।
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