हिमाचल प्रदेश में वृद्धावस्था पेंशन फर्जीवाड़े की जांच, 44 लोग संदिग्ध
Himachal: वृद्धावस्था पेंशन फर्जीवाड़े में एफआईआर दर्ज, 44 लोगों के साथ अफसर भी जांच के घेरे में
Amar Ujala
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हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले में वृद्धावस्था पेंशन फर्जीवाड़े के आरोप में 44 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। जांच में पंचायत सचिव की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। सामाजिक न्याय विभाग ने सभी जिला कल्याण अधिकारियों को मामलों का दोबारा सत्यापन करने का निर्देश दिया है।
- 0144 लोगों पर वृद्धावस्था पेंशन का फर्जी लाभ लेने का आरोप
- 02पंचायत सचिव की भूमिका भी जांच के दायरे में
- 03सामाजिक न्याय विभाग ने सभी जिला कल्याण अधिकारियों को सत्यापन का निर्देश दिया
- 04पुलिस ने मामले में एफआईआर दर्ज की, आगे की जांच जारी
- 05सरकारी योजनाओं में फर्जी लाभ लेने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी
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हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले की तांगणू-जांगलिख पंचायत में 44 लोगों पर 60 वर्ष की अनिवार्य आयु सीमा से पहले वृद्धावस्था पेंशन लेने का आरोप है। इनमें 25 पुरुष और 19 महिलाएं शामिल हैं, जिनकी उम्र 44 से 54 साल के बीच है। आरोप है कि ये लोग 2018-19 से पेंशन का अनुचित लाभ ले रहे हैं। मामले की शिकायत पर चिड़गांव पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज की गई है। जांच में पाया गया है कि पंचायत सचिव की भूमिका भी संदिग्ध है, क्योंकि दस्तावेजों के सत्यापन में लापरवाही बरती गई है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के सचिव सीपी वर्मा ने सभी जिला कल्याण अधिकारियों को ऐसे मामलों का दोबारा सत्यापन करने का निर्देश दिया है। पुलिस दस्तावेजों की सत्यता की जांच कर रही है और आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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इस मामले से प्रभावित लोगों को पेंशन का लाभ नहीं मिल सकेगा, और सरकारी योजनाओं में सुधार की आवश्यकता होगी।
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