मछलियों के शरीर की संरचना: पानी में सांस लेने और पसीने की कमी का विज्ञान
पानी में सांस, बिना पसीने की जिंदगी... मछलियों के शरीर का साइंस समझिए
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गर्मी में मछलियों की जीवित रहने की प्रक्रिया को समझना महत्वपूर्ण है। मछलियों को सांस लेने के लिए ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है, जिसे वे गलफड़ों के माध्यम से पानी से प्राप्त करती हैं। मछलियों को पसीना नहीं आता, क्योंकि वे ठंडे खून वाली जीव हैं और पानी में रहती हैं।
- 01मछलियों के गलफड़े ऑक्सीजन को पानी से खींचने में मदद करते हैं, जो इंसानों के फेफड़ों के समान कार्य करते हैं।
- 02पानी में ऑक्सीजन की मात्रा हवा की तुलना में कम होती है, जिससे मछलियों को सांस लेना कठिन होता है।
- 03मछलियों को पसीना नहीं आता, क्योंकि वे ठंडे खून वाली जीव हैं और पानी में रहने के कारण उन्हें पसीने की आवश्यकता नहीं होती।
- 04डेथ जोन ऐसे स्थान हैं जहां ऑक्सीजन की कमी होती है, जिससे मछलियां जीवित नहीं रह पातीं।
- 05मछलियों के गलफड़े पानी से बाहर आने पर सूख जाते हैं, जिससे वे सांस नहीं ले पातीं।
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इस समय भारत और यूरोप में भीषण गर्मी का सामना किया जा रहा है, जबकि मछलियों की जीवित रहने की प्रक्रिया का अध्ययन करना आवश्यक है। मछलियों को जीवित रहने के लिए ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है, जिसे वे पानी में घुली ऑक्सीजन से प्राप्त करती हैं। यह प्रक्रिया गलफड़ों के माध्यम से होती है, जो इंसानों के फेफड़ों के समान कार्य करते हैं। मछलियों को पसीना नहीं आता, क्योंकि वे ठंडे खून वाली जीव हैं और पानी में रहने के कारण उन्हें पसीने की आवश्यकता नहीं होती। पानी में ऑक्सीजन की कमी के कारण मछलियों को सांस लेना कठिन होता है, और ऐसे स्थान जहां ऑक्सीजन की मात्रा बहुत कम होती है, उन्हें डेथ जोन कहा जाता है। पानी से बाहर आने पर मछलियों के गलफड़े सूख जाते हैं, जिससे वे सांस नहीं ले पातीं।
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