उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनावों के लिए प्रशासक समिति का गठन प्रस्तावित
Panchayat Chunav : CM योगी को भेजा प्रशासक कमेटी के गठिन का प्रस्ताव, 26 मई को समाप्त हो रहा ग्राम पंचायतों का कार्यकाल
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Image: Jagran
उत्तर प्रदेश में पंचायतों के कार्यकाल का अंत 26 मई को हो रहा है, और मुख्यमंत्री को पंचायत प्रतिनिधियों की प्रशासक समिति के गठन का प्रस्ताव भेजा गया है। यह कदम आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर उठाया जा रहा है, जिससे भाजपा को चुनावी लाभ मिल सकता है।
- 01पंचायती राज विभाग ने मुख्यमंत्री को पंचायत प्रतिनिधियों की प्रशासक समिति के गठन का प्रस्ताव भेजा है।
- 02ग्राम पंचायतों का कार्यकाल 26 मई को समाप्त हो रहा है, जबकि क्षेत्र पंचायतों और जिला पंचायतों का कार्यकाल क्रमशः 19 और 11 जुलाई को समाप्त होगा।
- 03ब्लाक प्रमुख संघ और ग्राम प्रधान संगठन के पदाधिकारियों ने कार्यकाल बढ़ाने की मांग की है।
- 04धीरेंद्र प्रताप सिंह सेनानी ने कहा कि पंचायत प्रतिनिधियों को प्रशासक की जिम्मेदारी मिलने से योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन होगा।
- 05सरकार का यह निर्णय आगामी विधानसभा चुनावों में भाजपा के लिए फायदेमंद माना जा रहा है।
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उत्तर प्रदेश में पहली बार पंचायतों में प्रशासक के बजाय जनप्रतिनिधियों की प्रशासक समिति का गठन करने की तैयारी है। पंचायती राज विभाग ने इस संबंध में प्रस्ताव तैयार कर मुख्यमंत्री को भेजा है। मौजूदा ग्राम पंचायतों का कार्यकाल 26 मई को समाप्त हो रहा है, जिससे जल्द ही इस प्रस्ताव पर निर्णय होने की संभावना है। ब्लाक प्रमुख संघ और ग्राम प्रधान संगठन के पदाधिकारियों ने कार्यकाल बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री और अन्य अधिकारियों से लगातार मांग की है। ब्लाक प्रमुख संघ के प्रदेश अध्यक्ष धीरेंद्र प्रताप सिंह सेनानी का कहना है कि राजस्थान और मध्यप्रदेश की तरह यदि पंचायत प्रतिनिधियों को प्रशासक की जिम्मेदारी दी जाती है, तो योजनाओं का क्रियान्वयन बेहतर तरीके से होगा। सरकार के सूत्रों के अनुसार, आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर, अफसरों को प्रशासक बनाने के बजाय पंचायत प्रतिनिधियों को ही जिम्मेदारी सौंपने की पक्षधरता है। यह निर्णय भाजपा के लिए चुनाव में लाभकारी माना जा रहा है। ग्राम पंचायतों का कार्यकाल 26 मई को समाप्त होने के अलावा, क्षेत्र पंचायतों का कार्यकाल 19 जुलाई और जिला पंचायतों का कार्यकाल 11 जुलाई को समाप्त होगा।
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यदि पंचायत प्रतिनिधियों को प्रशासक की जिम्मेदारी दी जाती है, तो इससे योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन होगा, जो ग्रामीण विकास के लिए महत्वपूर्ण है।
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