एनएबीएल ने स्मार्ट मीटरों की जांच विवाद की शुरू की समीक्षा
NABL पहुंचा स्मार्ट मीटरों की चेकिंग का विवाद, उपभोक्ता परिषद की शिकायत के बाद मामले का रिब्यू शुरू
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Image: Jagran
लखनऊ में स्मार्ट प्रीपेड मीटरों की जांच को लेकर विवाद नेशनल एक्रीडिटेशन बोर्ड फार टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लेबोरेट्रीज (एनएबीएल) तक पहुंच गया है। उपभोक्ता परिषद की शिकायत के बाद एनएबीएल ने मामले की समीक्षा शुरू की है, जिसमें आरोप है कि संबंधित प्रयोगशाला के पास आवश्यक लाइसेंस नहीं है।
- 01उपभोक्ता परिषद ने एनएबीएल को स्मार्ट मीटरों की जांच को लेकर शिकायत की थी।
- 02एनएबीएल ने शिकायतों की समीक्षा की पुष्टि की है और कहा है कि जांच चल रही है।
- 03मध्यांचल विद्युत वितरण निगम की प्रयोगशाला को स्मार्ट मीटर की जांच के लिए आवश्यक लाइसेंस नहीं मिला है।
- 04भारतीय मानक (आइएस) 16444 के तहत लाइसेंस प्राप्त न होने के कारण जांच वैध नहीं मानी जा सकती।
- 05बीआइएस कानून के तहत उल्लंघन पर दो वर्ष तक की सजा या जुर्माना हो सकता है।
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लखनऊ में स्मार्ट प्रीपेड मीटरों की जांच को लेकर विवाद नेशनल एक्रीडिटेशन बोर्ड फार टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लेबोरेट्रीज (एनएबीएल) तक पहुंच गया है। उपभोक्ता परिषद ने शिकायत की थी कि मध्यांचल विद्युत वितरण निगम की प्रयोगशाला को स्मार्ट मीटरों की जांच के लिए आवश्यक लाइसेंस नहीं मिला है। परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने बताया कि एनएबीएल ने शिकायत को स्वीकार किया है और इसकी समीक्षा शुरू कर दी है। उन्होंने कहा कि भारतीय मानक (आइएस) 16444 के तहत लाइसेंस के बिना जांच कराना उचित नहीं है। यह भी उल्लेखनीय है कि स्मार्ट मीटरों के महत्वपूर्ण पैरामीटर की जांच केवल वैध लाइसेंस वाली लैब कर सकती है। उपभोक्ता परिषद ने नियामक आयोग में भी प्रस्ताव दाखिल किया है। बीआइएस कानून के अनुसार, यदि कोई प्रयोगशाला बिना लाइसेंस के जांच करती है, तो उसे पहली बार में दो वर्ष तक की सजा या न्यूनतम दो लाख रुपये तक जुर्माना हो सकता है। दूसरी बार उल्लंघन पर जुर्माना बढ़कर पांच लाख रुपये या उससे अधिक हो सकता है।
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यह विवाद उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि स्मार्ट मीटरों की जांच की वैधता पर सवाल उठता है, जिससे उपभोक्ताओं को सही बिलिंग और सेवाएं सुनिश्चित करने में मदद मिल सकती है।
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