भारत की सबसे कठिन भाषा: मलयालम का 1200 साल पुराना इतिहास
भारत की सबसे ज्यादा मुश्किल भाषा, जिसे रोजाना बोलते-लिखते हैं 4 करोड़ लोग; 1200 साल पुराना है इतिहास
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भारत में लगभग 2,000 भाषाएँ बोली जाती हैं, जिनमें से मलयालम को सबसे कठिन माना जाता है। यह भाषा मुख्य रूप से केरल में बोली जाती है और लगभग 4 करोड़ लोग इसे बोलते हैं। मलयालम का इतिहास 1200 साल पुराना है, और यह द्रविड़ भाषा परिवार से संबंधित है।
- 01भारत में 22 भाषाओं को संविधान में मान्यता प्राप्त है, जिनमें मलयालम भी शामिल है।
- 02मलयालम भाषा का उच्चारण और व्याकरण जटिल है, जिससे इसे कठिन माना जाता है।
- 03मलयालम का इतिहास लगभग 1200 साल पुराना है, और इसका पहला अभिलेख 9वीं शताब्दी का है।
- 04यह भाषा मुख्य रूप से केरल, लक्षद्वीप, तमिलनाडु, कर्नाटक और महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में बोली जाती है।
- 05भारत की कुल आबादी का 2.88% मलयालम को अपनी मातृभाषा मानते हैं।
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भारत की भाषाई विविधता में लगभग 2,000 भाषाएँ शामिल हैं, जिनमें से 22 को संविधान में विशेष मान्यता प्राप्त है। इनमें से मलयालम को सबसे कठिन भाषा माना जाता है, जिसे मुख्यतः केरल में बोला जाता है। लगभग 4 करोड़ लोग इस भाषा का उपयोग करते हैं। मलयालम का उच्चारण और व्याकरण जटिल है, जिससे इसे बोलना आसान नहीं है। इसका इतिहास 1200 साल पुराना है, और इसका पहला ज्ञात अभिलेख 9वीं शताब्दी का है। विद्वानों के अनुसार, मलयालम का विकास तमिल भाषा से हुआ है, और इसकी शब्दावली में संस्कृत के कई शब्द भी शामिल हैं। यह भाषा भारत की कुल आबादी का 2.88% हिस्सा है और लक्षद्वीप, तमिलनाडु, कर्नाटक और महाराष्ट्र के कुछ क्षेत्रों में भी बोली जाती है।
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मलयालम भाषा की कठिनाई और इसकी समृद्धि के कारण, यह भाषा बोलने वाले समुदायों में सांस्कृतिक पहचान को मजबूत बनाती है।
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