मदर्स डे पर पुष्पलता और उषा दास की समाजसेवा की कहानी
मदर्स डे विशेष : जिनका कोई नहीं उनकी मां बनीं पुष्पलता
Amar Ujala
Image: Amar Ujala
गोरखपुर की पुष्पलता और उषा दास ने समाजसेवा में अद्वितीय योगदान दिया है। पुष्पलता बेघरों और बेसहारों की देखभाल करती हैं, जबकि उषा दास 500 से अधिक बच्चों की मदद कर उन्हें शिक्षित कर रही हैं। दोनों ही महिलाएं मातृत्व का उदाहरण पेश कर रही हैं।
- 01पुष्पलता बेघरों और बेसहारों की मां की तरह देखभाल करती हैं।
- 02उषा दास ने 500 से अधिक बच्चों की मदद की है।
- 03दोनों महिलाएं समाज में प्रेरणा का स्रोत बनी हैं।
- 04पुष्पलता ने कभी शादी नहीं की और समाज सेवा को चुना।
- 05संगीता ने आत्मनिर्भरता का उदाहरण पेश किया है।
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गोरखपुर की 51 वर्षीय पुष्पलता सिंह ने समाज सेवा को अपनी जिंदगी का मकसद बना लिया है। वह बेघरों और बेसहारों की देखभाल मां की तरह करती हैं। पुष्पलता ने कभी शादी नहीं की और अपने माता-पिता के साथ रहती हैं। उन्होंने कूड़ा बीन रहे बच्चों की मदद की है और कई विक्षिप्त बुजुर्गों को अस्पताल पहुंचाया है। दूसरी ओर, उषा दास, जो 26 वर्षों से जरूरतमंद बच्चों की मदद कर रही हैं, ने 500 से अधिक बच्चों को शिक्षित किया है। उन्होंने बताया कि उनके पास वर्तमान में 45 बच्चे हैं, जिनकी हर इच्छा का ध्यान रखा जाता है। इन दोनों महिलाओं की कहानियां मातृत्व और समाज सेवा की प्रेरणा देती हैं। इसके अतिरिक्त, संगीता ने भी आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है, जिन्होंने गोबर के उपले बनाने का काम शुरू किया और इससे कई महिलाओं को रोजगार दिया।
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इन महिलाओं की समाज सेवा से स्थानीय समुदाय में बेघरों और बेसहारों के प्रति जागरूकता बढ़ी है और जरूरतमंद बच्चों को शिक्षा मिल रही है।
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