बंगाल में कॉलेजों में छात्र यूनियनों की वसूली पर प्रशासन का सख्त कदम
बंगाल: यूनियनों की 'गुंडागर्दी' और वसूली पर प्रशासन सख्त, कालेजों को 30 दिनों का अल्टीमेटम
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बंगाल में सरकार ने कॉलेजों में छात्र यूनियनों द्वारा की जा रही अवैध वसूली पर रोक लगाने के लिए 30 दिनों का अल्टीमेटम दिया है। सभी सरकारी और सहायता प्राप्त कॉलेजों को आडिट रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया गया है।
- 01राज्य सरकार ने छात्र यूनियनों के नाम पर अवैध वसूली पर रोक लगाने का निर्णय लिया है।
- 02उच्च शिक्षा विभाग ने सभी कॉलेजों को 30 दिनों में विस्तृत आडिट रिपोर्ट जमा करने का आदेश दिया है।
- 03कोई भी शैक्षणिक संस्थान अब स्टूडेंट यूनियन फीस नहीं ले सकता जब तक निर्वाचित प्रतिनिधि नहीं हैं।
- 04सरकार का यह कदम पिछले शासनकाल में छात्र यूनियनों में हुए भ्रष्टाचार को उजागर करने के लिए है।
- 05अवैध वसूली के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और सभी खर्चों का हिसाब उच्च शिक्षा विभाग को देना होगा।
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बंगाल की सरकार ने कालेजों और विश्वविद्यालयों में छात्र यूनियनों द्वारा की जा रही अवैध वसूली पर रोक लगाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। नवान्न (राज्य सचिवालय) ने सभी सरकारी और सहायता प्राप्त कालेजों को निर्देश दिया है कि वे अगले 30 दिनों में अपनी विस्तृत आडिट रिपोर्ट प्रस्तुत करें। नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, राज्य के किसी भी शैक्षणिक संस्थान में चुनी हुई छात्र परिषद या यूनियन का अस्तित्व नहीं है, और इसके चलते छात्रों से 'स्टूडेंट यूनियन फीस' के नाम पर कोई भी राशि नहीं ली जा सकती। इसके बावजूद, पिछले कुछ समय से यह अवैध वसूली चल रही थी। सरकार ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए आदेश दिया है कि यह वसूली तुरंत बंद हो। इसके साथ ही, छात्र संघों द्वारा जुटाए गए फंड और उनके खर्च का विवरण भी उच्च शिक्षा विभाग को सौंपना होगा। इस कदम को पिछले शासनकाल में छात्र यूनियनों में हुए भ्रष्टाचार को उजागर करने और शिक्षा परिसरों को राजनीतिक प्रभाव से मुक्त करने के लिए एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है।
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यह कदम शिक्षा क्षेत्र में भ्रष्टाचार को कम करने और छात्रों की वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद करेगा।
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