मोहन भागवत का बयान: जनसंख्या नियंत्रण और समान नागरिक संहिता के लिए जनसहयोग जरूरी
"सिर्फ कानून से काम नहीं चलेगा", यूनिफॉर्म सिविल कोड और जनसंख्या नियंत्रण पर मोहन भागवत का बड़ा बयान
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि जनसंख्या नियंत्रण नीतियों और समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के सफल कार्यान्वयन के लिए जनसहयोग और दीर्घकालिक सोच आवश्यक है। उन्होंने जाति आधारित राजनीति के समाप्त होने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
- 01जनसंख्या नियंत्रण और यूसीसी के लिए जनसहयोग आवश्यक है।
- 02जाति आधारित राजनीति समाप्त करने के लिए समाज को जातिगत पहचान से ऊपर उठना होगा।
- 03आरएसएस एक सामाजिक संगठन है, न कि सरकार।
- 04नीतियों का सफल कार्यान्वयन जनता के सहयोग पर निर्भर करता है।
- 05आपातकाल के दौरान जनसंख्या नियंत्रण उपायों के प्रति असंतोष का जिक्र किया।
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नई दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने जनसंख्या नियंत्रण नीतियों और समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के सफल कार्यान्वयन के लिए जनसहयोग और दीर्घकालिक सोच की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जाति आधारित राजनीति तब समाप्त होगी जब समाज जातिगत पहचान से ऊपर उठेगा। भागवत ने बताया कि जब तक जनता का सहयोग नहीं मिलेगा, कोई भी कानून सफल नहीं हो सकता। उन्होंने आपातकाल के दौरान अपनाए गए जनसंख्या नियंत्रण उपायों का उल्लेख करते हुए कहा कि आक्रामक नीतियों के कारण असंतोष पैदा हुआ था। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे नारेबाजी के बजाय आचरण के माध्यम से समानता को अपनाएं।
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यह बयान जनसंख्या नियंत्रण और समान नागरिक संहिता को लेकर समाज में जागरूकता बढ़ा सकता है।
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