बिहार में पीएम विश्वकर्मा योजना का लाभ नहीं पहुंच रहा कारीगरों तक
PM Vishwakarma Yojana: देश में दौड़ रही योजना, बिहार पिछड़ा; कारीगरों तक क्यों नहीं पहुंच रहा लाभ?
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प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना देशभर में कारीगरों को सशक्त बनाने के लिए शुरू की गई थी, लेकिन बिहार में इसका लाभ कम हो रहा है। राज्य में ऋण, टूल-किट और प्रशिक्षण में कमी के कारण लाखों कारीगरों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है। विशेषज्ञ इसे जागरूकता और प्रशासनिक समस्याओं से जोड़ते हैं।
- 01बिहार में पीएम विश्वकर्मा योजना का लाभ कम है।
- 02राज्य में केवल 24,655 लोगों को रियायती ऋण मिला है।
- 03जागरूकता की कमी और डिजिटल साक्षरता की कमी प्रमुख बाधाएं हैं।
- 04प्रशासनिक और बैंकिंग प्रक्रियाएं ऋण स्वीकृति में देरी कर रही हैं।
- 05विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता अभियान और प्रशिक्षण केंद्रों की आवश्यकता है।
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प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना, जो 17 सितंबर 2023 को शुरू की गई, का उद्देश्य पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को आत्मनिर्भर बनाना है। इस योजना के तहत कारीगरों को 15,000 रुपये का टूल-किट और 1-2 लाख रुपये तक का ऋण दिया जाता है। हालांकि, बिहार में योजना का लाभ अपेक्षाकृत कम है। राज्य में अब तक केवल 24,655 लोगों को रियायती ऋण मिला है, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह संख्या 5.84 लाख से अधिक है। विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता की कमी, डिजिटल साक्षरता की कमी, और प्रशासनिक अड़चनें इस स्थिति का मुख्य कारण हैं। ग्रामीण कारीगरों को योजना की जानकारी नहीं है और ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में कठिनाइयाँ आ रही हैं। इसके अलावा, बैंकिंग प्रक्रियाएं भी ऋण स्वीकृति में देरी कर रही हैं। विशेषज्ञों का सुझाव है कि जागरूकता अभियान चलाना, डिजिटल प्रक्रियाओं को सरल बनाना, और प्रशिक्षण केंद्रों की संख्या बढ़ाना आवश्यक है ताकि बिहार के कारीगर इस योजना का पूरा लाभ उठा सकें।
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यदि बिहार में जागरूकता और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में सुधार होता है, तो लाखों कारीगर इस योजना के लाभों का उपयोग कर सकते हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होगा।
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