उत्तर प्रदेश में 4.5 लाख हेक्टेयर वन भूमि का अधिग्रहण प्रक्रिया में देरी
UP News: 4.5 लाख हेक्टेयर वन भूमि का अधिग्रहण अधूरा, दशकों से प्रक्रिया अटकी; अधिसूचना हो चुकी है जारी

Image: Amar Ujala
उत्तर प्रदेश में वन विभाग द्वारा 4.59 लाख हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण अभी तक पूरा नहीं हुआ है। भारतीय वन अधिनियम 1927 के तहत यह प्रक्रिया वर्षों से लंबित है, जिससे सरकारी स्वामित्व की अंतिम मुहर नहीं लग पाई है।
- 01वन विभाग ने 1952 के बाद से 12,237,718.26 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण करने का इरादा जताया है।
- 02अब तक केवल 705,780.36 हेक्टेयर भूमि को धारा-20 के तहत अधिसूचित किया गया है।
- 03458,829 हेक्टेयर भूमि अभी भी धारा-4 से धारा-20 के बीच की प्रक्रिया में है।
- 0459108 हेक्टेयर भूमि स्थानीय लोगों के पक्ष में छोड़ी जा चुकी है।
- 05वन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि लंबित मामलों के निपटारे के लिए समर्पित एफएसओ की आवश्यकता है।
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उत्तर प्रदेश में वन विभाग की 4.59 लाख हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। भारतीय वन अधिनियम 1927 के तहत अधिसूचना जारी होने के बावजूद, लंबित दावों और आपत्तियों के कारण यह प्रक्रिया दशकों से अटकी हुई है। वन विभाग ने 1952 से अब तक 12,237,718.26 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण करने का इरादा जताया है, लेकिन केवल 705,780.36 हेक्टेयर भूमि को धारा-20 के तहत अधिसूचित किया गया है। शेष 458,829 हेक्टेयर भूमि अभी भी धारा-4 से धारा-20 के बीच की प्रक्रिया में है। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि लंबित मामलों के निपटारे के लिए समर्पित एफएसओ की आवश्यकता है, जिससे प्रक्रिया को तेजी से पूरा किया जा सके। इस संदर्भ में, वन विभाग के प्रमुख सुनील कुमार चौधरी ने भी इस मुद्दे पर ध्यान दिया है।
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इस अधिग्रहण प्रक्रिया में देरी से स्थानीय समुदायों के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं, जिससे भूमि उपयोग और संरक्षण में बाधा आ रही है।
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