इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला: लोन चुकाने के बाद बैंक नहीं रख सकता मकान के दस्तावेज
इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, लोन चुकाने के बाद बैंक नहीं रोक सकता मकान के कागज

Image: News 18 Hindi
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि लोन की पूरी राशि चुकाने के बाद बैंक किसी व्यक्ति के मकान के मूल दस्तावेज नहीं रख सकता। यह आदेश एक महिला के पक्ष में दिया गया, जिसने अपनी बेटी की शादी के लिए दस्तावेजों की मांग की थी।
- 01हाईकोर्ट ने बैंक ऑफ इंडिया को आदेश दिया कि वह महिला के मकान के दस्तावेज दो सप्ताह में लौटाए।
- 02महिला ने 2002 में गाजियाबाद में मकान खरीदा और 2012 में बैंक ने उसे बंधक रखा।
- 03बैंक ने लोन न चुकाने के कारण 22 लाख रुपये की बकाया राशि बताई थी।
- 04महिला ने 5.50 लाख रुपये जमा कर समझौता किया और बैंक ने अदेय प्रमाण पत्र जारी किया।
- 05कोर्ट ने कहा कि बैंक का रवैया अन्यायपूर्ण था और दस्तावेज रोकने का कोई अधिकार नहीं था।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया है कि यदि कोई व्यक्ति लोन की पूरी राशि चुका देता है, तो बैंक उसके मकान के मूल दस्तावेज अपने पास नहीं रख सकता। यह आदेश एक महिला के पक्ष में दिया गया, जिसने अपनी बेटी की शादी के लिए आर्थिक संसाधन जुटाने के लिए दस्तावेजों की मांग की थी। कोर्ट ने बैंक ऑफ इंडिया को निर्देश दिया कि वह महिला के मकान के बैनामा और अन्य मूल दस्तावेज दो सप्ताह के भीतर वापस करे। मामले में महिला ने 2002 में गाजियाबाद में मकान खरीदा था, लेकिन बैंक ने उसे 2012 में बंधक रखा। बैंक ने लोन की बकाया राशि 22 लाख रुपये बताई थी, लेकिन महिला ने 5.50 लाख रुपये जमा कर समझौता किया। कोर्ट ने बैंक के रवैये को अन्यायपूर्ण मानते हुए कहा कि दस्तावेजों का न लौटाना महिला के अधिकारों का उल्लंघन है।
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इस फैसले से उन व्यक्तियों को राहत मिलेगी जो लोन चुकाने के बाद अपने दस्तावेजों की वापसी के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
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