उत्तर प्रदेश और बिहार में प्रजनन दर में कमी, बाल विवाह और शिक्षा में सुधार: एनएफएचएस-6
UP-बिहार में तेजी से घटी प्रजनन दर, बाल विवाह में कमी और बालिका शिक्षा से सुधरे हालात: NFHS 6
Business Standard
Image: Business Standard
उत्तर प्रदेश और बिहार में प्रजनन दर में उल्लेखनीय कमी आई है, जो अब राष्ट्रीय औसत के करीब है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 के अनुसार, बाल विवाह में कमी और बालिका शिक्षा में सुधार से स्वास्थ्य संकेतकों में भी सुधार हुआ है।
- 01उत्तर प्रदेश की प्रजनन दर 2.4 से घटकर 2.2 और बिहार की 3.0 से घटकर 2.7 हो गई है।
- 02मेघालय में प्रजनन दर 2.7 से घटकर 2.2 बच्चे प्रति महिला हो गई है।
- 03गर्भनिरोधक के उपयोग की दर 66.7% से बढ़कर 69.1% हो गई है।
- 04दक्षिणी राज्यों में प्रजनन दर स्थिर या मामूली बढ़ी है, जैसे तेलंगाना में 1.9 और आंध्र प्रदेश में 1.8।
- 05विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर-दक्षिण का प्रजनन अंतर खत्म हो सकता है।
Advertisement
In-Article Ad
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 (एनएफएचएस-6) के आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश और बिहार में प्रजनन दर में उल्लेखनीय कमी आई है। उत्तर प्रदेश में यह 2.4 से घटकर 2.2 और बिहार में 3.0 से घटकर 2.7 हो गई है। मेघालय में भी प्रजनन दर 2.7 से घटकर 2.2 बच्चे प्रति महिला हो गई है, जो राष्ट्रीय औसत के करीब है। बाल विवाह में कमी और बालिका शिक्षा में सुधार के चलते मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य संकेतकों में भी सुधार हुआ है। गर्भनिरोधक के उपयोग की दर 66.7% से बढ़कर 69.1% हो गई है। दक्षिणी राज्यों में प्रजनन दर स्थिर या मामूली बढ़ी है, जैसे तेलंगाना में 1.9 और आंध्र प्रदेश में 1.8। विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर-दक्षिण का प्रजनन अंतर खत्म हो सकता है।
Advertisement
In-Article Ad
प्रजनन दर में कमी और बाल विवाह में कमी से स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार हुआ है, जिससे मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में सुधार हो रहा है।
Advertisement
In-Article Ad
Reader Poll
आपको क्या लगता है कि प्रजनन दर में कमी का मुख्य कारण क्या है?
Connecting to poll...
मूल लेख पढ़ें
पूरी कहानी के लिए मूल स्रोत पर जाएं।




