अप्रैल में IIP ग्रोथ में 4.9% की बढ़ोतरी, लेकिन चुनौतियां बरकरार
अप्रैल में दौड़ी फैक्ट्रियां! IIP ग्रोथ में जोरदार उछाल, लेकिन आगे बड़ा खतरा बरकरार
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अप्रैल 2026 में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) में 4.9% की वृद्धि हुई, जो मार्च में 3.2% थी। इस वृद्धि का मुख्य कारण मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का 6.2% का सुधार है। हालांकि, आगे की चुनौतियां जैसे कच्चे माल की ऊंची कीमतें और वैश्विक मांग में कमजोरी बनी हुई हैं।
- 01IIP का बेस ईयर 2011-12 से बदलकर 2022-23 किया गया है, जिससे आंकड़ों की तुलना में अंतर आ सकता है।
- 02मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में FY25 की 6.2% की ग्रोथ FY26 में घटकर 4.9% रह गई है।
- 03उपभोक्ता सामानों की ग्रोथ 3.5% रही, जबकि कैपिटल गुड्स की ग्रोथ 16% दर्ज की गई।
- 04खनन क्षेत्र में 5.1% की गिरावट आई, जिससे कुल औद्योगिक उत्पादन पर दबाव पड़ा।
- 05आने वाले महीनों में सप्लाई चेन की दिक्कतें और कच्चे माल की ऊंची कीमतें उद्योगों के लिए चुनौती बनी रहेंगी।
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अप्रैल 2026 में भारत के औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) में 4.9% की वृद्धि दर्ज की गई, जो मार्च में 3.2% थी। इस वृद्धि का मुख्य कारण मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का 6.2% का सुधार है। हालांकि, रिपोर्ट के अनुसार, मैन्युफैक्चरिंग की रफ्तार पिछले वित्त वर्ष की तुलना में धीमी हुई है। बिजली और गैस क्षेत्र में 4.9% की वृद्धि हुई, जबकि खनन क्षेत्र में 5.1% की गिरावट आई। उपभोक्ता सामानों की मांग में सुधार हुआ है, जिससे उपभोक्ता वस्तुओं की ग्रोथ 3.5% रही। हालांकि, नुवामा की रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि आने वाले महीनों में सप्लाई चेन की दिक्कतें और कच्चे माल की ऊंची कीमतें उद्योगों के लिए चुनौती बनी रहेंगी। यदि अल नीनो और कमजोर मानसून का खतरा बढ़ता है, तो इसका असर कृषि और खाद्य महंगाई पर पड़ सकता है।
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उद्योगों में सुधार के बावजूद, कच्चे माल की ऊंची कीमतें और सप्लाई चेन की दिक्कतें उपभोक्ताओं और कंपनियों पर दबाव डाल सकती हैं।
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